SIR को लेकर चुनाव आयोग ने दूर की भ्रांतियां, कहा- अधिकांश मतदाताओं को दस्तावेज़ देने की जरूरत नहीं, नोटिस मिलने पर ही देना होगा दस्तावेज़, बिहार से तुलना पर दी ये सफाई..
घर-घर पहुंचेंगे BLO, सिर्फ फॉर्म और फोटो जमा करने से ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में रहेगा नाम, 2.11 करोड़ मतदाताओं की मैपिंग प्रक्रिया पूरी - चुनाव आयोग

रांची. झारखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) 2026 को लेकर राजनीतिक दलों द्वारा उठाए गए सवालों पर निर्वाचन आयोग ने आज स्थिति पूरी तरह साफ कर दी है। चुनाव आयोग ने स्पष्ट किया है कि ‘गणना चरण’ के दौरान मतदाताओं को किसी भी तरह का दस्तावेज़ जमा करने की कोई आवश्यकता नहीं है। आयोग के मुताबिक, यह पूरी प्रक्रिया को एसएआर को पारदर्शी बनाने और मतदाताओं की सुविधा को देते हुए की जा रही है।
आयोग ने अपने दिशा निर्देशों का हवाला देते हुए कहा है कि गणना चरण के दौरान मतदाताओं से कोई दस्तावेज़ नहीं लिया जाएगा। आयोग ने बताया कि झारखंड की 2026 की मतदाता सूची में शामिल मौजूदा मतदाताओं में से बहुत ही कम लोगों को दस्तावेज़ जमा करने की ज़रूरत पड़ेगी। दस्तावेज़ केवल उन्हीं मतदाताओं से लिए जाएंगे जिनकी पहचान ‘नोटिस और सत्यापन अवधि’ (5 अगस्त से 3 अक्टूबर 2026) के दौरान की जाएगी।
चुनाव आयोग ने मौजूदा मतदाताओं की स्थिति को तीन अलग-अलग श्रेणियों में समझाते हुए बताया है कि किसी को भी शुरुआती चरण में परेशान होने की जरूरत नहीं है। जिनकी मैपिंग (Self or Parental Mapping) पूरी हो चुकी है, ऐसे मतदाता जिन्होंने बिना किसी गड़बड़ी के अपनी या अपने माता-पिता की मैपिंग पूरी कर ली है, उन्हें कोई दस्तावेज़ नहीं देना है। उन्हें केवल BLO द्वारा घर पर दिए गए गणना प्रपत्र को भरकर, हस्ताक्षर करके एक रंगीन फोटो के साथ जमा करना होगा। उनका नाम सीधे SIR 2026 की ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में आ जाएगा।
जिन मतदाताओं की मैपिंग पूरी नहीं हुई है, उन्हें भी इस चरण में कोई कागज़ात नहीं देना है। बूथ स्तर के अधिकारी (BLO), ERO और AERO गणना के दौरान खुद उनकी मैपिंग पूरी करने का प्रयास करेंगे। यदि मतदाता अपनी पुरानी SIR (जैसे 2003 की लिस्ट) के बारे में सही जानकारी देते हैं, तो अधिकारी उसे चुनाव आयोग की वेबसाइट से खुद खोज लेंगे। चुनाव आयोग ने बताया कि BLO खुद हर घर जाकर पहले से भरा हुआ पर्सनलाइज़्ड गणना फॉर्म बांटेंगे और उसे वापस इकट्ठा करके डिजिटाइज़ करेंगे। मतदाताओं को किसी दफ्तर के चक्कर काटने की ज़रूरत नहीं है।
पुरानी SIR लिस्ट खुद अधिकारियों के पास उपलब्ध
चुनाव आयोग ने साफ किया है कि भारत के किसी भी हिस्से में या झारखंड की 2003 की पुरानी SIR वोटर लिस्ट में नाम होना एक अहम दस्तावेज़ है। यह पुरानी लिस्ट आपके विधानसभा क्षेत्र के ERO/AERO/BLO के पास पहले से मौजूद है। अधिकारी खुद वोटरों की तरफ से इसकी अटेस्टेड कॉपी जमा करेंगे, इसलिए आम जनता को पुराने कागज़ात ढूंढने की कोई आवश्यकता नहीं है।
नए वोटर्स और राज्य बदलने वालों के लिए क्या हैं गाइडलाइंस?
आयोग ने नए मतदाताओं और अन्य राज्यों से झारखंड आने वाले लोगों के लिए भी दिशानिर्देश जारी किए हैं। जो नागरिक 1 अक्टूबर 2026 को 18 वर्ष या उससे अधिक के हो रहे हैं और पहली बार नाम जुड़वा रहे हैं, उन्हें ‘फॉर्म-6’ के साथ घोषणा पत्र और जन्म तिथि व जन्म स्थान से जुड़े ज़रूरी दस्तावेज़ देने होंगे। वे अपने माता-पिता के नाम वाली पुरानी SIR लिस्ट का पेज भी लगा सकते हैं (जो BLO के पास उपलब्ध है)। इसके लिए ‘एन्यूमरेशन पीरियड’ (30 जून से 29 जुलाई 2026) और ‘क्लेम व ऑब्जेक्शन पीरियड’ (5 अगस्त से 4 सितंबर 2026) तय किया गया है।
जो मौजूदा मतदाता अपनी मैपिंग पूरी कर चुके हैं और झारखंड के ही किसी दूसरे विधानसभा क्षेत्र में शिफ्ट होना चाहते हैं, उन्हें कोई डॉक्यूमेंट नहीं देना है। उन्हें केवल ‘क्लेम और ऑब्जेक्शन’ अवधि (5 अगस्त से 4 सितंबर 2026) के दौरान ‘फॉर्म-8’ भरना होगा। दूसरे राज्यों की वोटर लिस्ट में शामिल जो लोग झारखंड के किसी क्षेत्र में नाम ट्रांसफर कराना चाहते हैं, उन्हें ‘फॉर्म-8’ के साथ डिक्लेरेशन और जन्म तिथि/स्थान से जुड़े आवश्यक दस्तावेज़ जमा करने होंगे।
झारखंड में 79.73% मैपिंग का कार्य पूरा
चुनाव आयोग द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 14 जून 2026 तक झारखंड के कुल 2.64 करोड़ मतदाताओं में से 2.11 करोड़ मतदाताओं (यानी करीब 79.73 प्रतिशत) ने अपनी या अपने माता-पिता की मैपिंग का कार्य सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। आयोग ने सभी हितधारकों, राजनीतिक दलों और नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी भ्रम में न आएं और वोटर लिस्ट को शुद्ध व पारदर्शी बनाने में सहयोग करें।



