
रांची. राजधानी में मानसून ने दस्तक दे दी है और इसी के साथ राँची नगर निगम के उन तमाम दावों की पोल भी खुल गई है जो वे गर्मी के महीनों में बैठकर करते रहे। हर साल की तरह इस साल भी जब मानसून शुरू हो गया और सड़कों पर पानी जमा होने लगा, तब जाकर निगम की नींद टूटी है। अब आनन-फानन में जलजमाव वाले हॉटस्पॉट पर जाकर अधिकारी खानापूर्ति में जुट गए हैं।
मामला वार्ड संख्या 20 स्थित सेवा सदन क्षेत्र का है, जहाँ पहली कुछ बारिशों में ही जलजमाव की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई। जब स्थानीय नागरिकों का गुस्सा फूटने लगा, तब आज कार्यपालक अभियंता संजीव कुमार अपनी अभियंत्रण शाखा की टीम को लेकर क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण करने पहुंचे।
स्थाई समाधान के बजाय ‘कच्चे नाले’ का जुगाड़
निगम की कार्यशैली का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इस गंभीर समस्या के किसी स्थाई समाधान के बजाय, तात्कालिक राहत के नाम पर स्थानीय निवासियों के सहयोग से एक कच्चे ड्रेन का निर्माण कार्य शुरू कराया गया है। इस कच्चे ड्रेन को मारवाड़ी कॉलेज के समीप स्थित नाले से जोड़ा जा रहा है, ताकि वर्षा जल की निकासी हो सके। करोड़ों का बजट रखने वाला रांची नगर निगम मानसून के बीच में कच्चे नाले खोदकर शहर को स्मार्ट बनाने की तैयारी में है।
हालांकि, निगम का दावा है कि क्षेत्र की पुरानी नालियों की नियमित सफाई का कार्य भी जारी है, ताकि नागरिकों को असुविधा न हो। लेकिन धरातल की सच्चाई यह है कि यह सारे काम मानसून से पहले पूरे हो जाने चाहिए थे। एक तरफ जहाँ राँची नगर निगम यह कह रहा है कि मानसून अवधि के दौरान जलजमाव प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ अपनी नाकामियों को छुपाने के लिए आनन फानन में कच्चे नालियों को खोदने का काम कर खानापूर्ति शुरू कर दी गयी है।



