
रांची. झारखंड के सबसे बड़े फ्लोटिंग सोलर पावर प्लांट का पहला चरण पूरा हो गया है। रांची के गेतलसूद डैम में 100 मेगावाट क्षमता वाले इस प्रोजेक्ट के तहत 50 मेगावाट का संयंत्र तैयार है। अब झारखंड बिजली वितरण निगम (जेबीवीएनएल) की ओर से नेटमीटरिंग प्रक्रिया बाकी है। इसके पूरा होते ही रांची के करीब एक लाख घरों को सौर ऊर्जा की आपूर्ति होने लगेगी। जुलाई अंत तक शेष 50 मेगावाट का संयंत्र भी चालू हो जाएगा। बता दें कि नेट मीटरिंग बिलिंग प्रणाली है, जो सौर ऊर्जा से उत्पादित और ग्रिड से उपयोग की गई बिजली के बीच के अंतर (नेट डिफरेंस) का हिसाब रखती है।
जनवरी, 2025 में शुरू हुआ था निर्माण, 437 करोड़ है परियोजना की लागत
करीब 437 करोड़ की लागत वाली इस परियोजना का निर्माण जनवरी 2025 में शुरू हुआ था। 17 महीने में पहला चरण तैयार हो गया। परियोजना के लिए झारखंड बिजली वितरण निगम (जेबीवीएनएल) और सोलर एनर्जी कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (सेकी) में 20 फरवरी 2019 को एमओयू हुआ था। लागत सेकी ने वहन की है। स्थान दिलाने और अन्य प्रक्रियाएं राज्य सरकार ने पूरी की है।
कैसे काम करेगा फ्लोटिंग सोलर प्लांट
रांची से लगभग 30 किमी दूर गेतलसूद जलाशय के ऊपर फ्लोटिंग सोलर प्लांट लगाया गया है। 172 हेक्टेयर क्षेत्र में स्थापित इस प्लांट में पानी की सतह पर तैरनेवाले सोलर प्लेट लगाए गए हैं। इनको ट्रांसफॉर्मर और केबल नेटवर्क से एचटी पैनल रूम से जोड़ा गया है। यहां से बिजली सीधे ग्रिड में जाएगी। इसके लिए 132 केवी डबल सर्किट गेतलसूद-हेसागढ़ ट्रांसमिशन लाइन तैयार की जा चुकी है। संयंत्र प्रतिदिन सुबह सात से शाम छह बजे तक बिजली उत्पादन करेगा। जेबीवीएनएल को इससे अधिकतम 3.55 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली मिलने की संभावना है। दर का निर्धारण केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग करेगा। इसे झारखंड में नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार की दिशा में बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। राज्य सरकार ने ‘झारखंड स्टेट सोलर पॉलिसी-2022’ के तहत वर्ष 2027 तक 4,000 मेगावाट सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है।



