
रांची. झारखंड के कई गांवों में ग्रामसभाओं ने डीजे बजाने पर रोक लगाने का फैसला किया है। यह निर्णय केवल शोर-शराबे को नियंत्रित करने के लिए नहीं, बल्कि आदिवासी संस्कृति, सामाजिक मर्यादा और गांव की पारंपरिक पहचान को बचाने के उद्देश्य से लिया गया बताया जा रहा है।
स्थानीय ग्रामीणों और ग्रामसभा के सदस्यों के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में गांवों में शादी समारोहों में डीजे का चलन तेजी से बढ़ा है। तेज आवाज, अश्लील गानों और देर रात तक चलने वाले शोर से ग्रामीण जीवन प्रभावित हो रहा था। कई जगहों पर युवाओं के बीच झगड़े, शराबखोरी और सामाजिक तनाव जैसी शिकायतें भी सामने आ रही थीं। इसी को देखते हुए ग्रामसभा ने सामूहिक बैठक कर यह फैसला लिया कि अब गांवों में शादी के दौरान डीजे नहीं बजाया जाएगा।
खबर के अनुसार, खूंटी जिले के मुरहू प्रखंड के कुदा, जिउरी, एटके, नामसीली, कोजड़ोंग, कुडापुर्ति, उबरु, डोंडी, बालंगा समेत कई गांवों में यह नियम लागू किया गया है। इन गांवों में अब विवाह समारोहों में डीजे की जगह पारंपरिक “पाइका नाच”, मांदर, ढोल और नगाड़ों की धुन पर नृत्य होगा। ग्रामसभा का कहना है कि आधुनिक DJ संस्कृति के कारण आदिवासी लोक परंपराएं धीरे-धीरे समाप्त होती जा रही थीं।
ग्रामीण बुजुर्गों ने भी इस फैसले का समर्थन किया है। उनका कहना है कि पहले गांवों में शादी का मतलब सामूहिक लोकगीत, मांदर की थाप और पारंपरिक नृत्य हुआ करता था, लेकिन अब डीजे संस्कृति ने उस माहौल को बदल दिया है। कई लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि डीजे में बजने वाले गानों से सामाजिक माहौल बिगड़ रहा था और बच्चों तथा महिलाओं पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ रहा था।
रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामसभा ने नियम तोड़ने वालों के खिलाफ 5000 रुपये जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। यदि कोई व्यक्ति गांव में DJ बजाता पाया गया, तो उस पर आर्थिक दंड लगाया जा सकता है। ग्रामसभा के प्रतिनिधियों का कहना है कि यह फैसला किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे गांव की सहमति से लिया गया सामुदायिक निर्णय है।



