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6 सूत्री मांगों को लेकर रांची में जल सहिया कर्मियों का धरना प्रदर्शन, सरकार से शीघ्र समाधान की मांग

रांची: झारखंड राज्य जल सहिया कर्मी संघ, झारखंड के बैनर तले आज दिनांक 17 मार्च 2026 को राज्यभर के जल सहिया कर्मियों ने अपनी 6 सूत्री मांगों के समर्थन में राजधानी रांची में धरना-प्रदर्शन किया। इस आंदोलन के माध्यम से संघ ने राज्य सरकार का ध्यान जल सहिया कर्मियों की लंबित समस्याओं और उनकी दयनीय स्थिति की ओर आकृष्ट कराया।

संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि राज्य के पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के अंतर्गत कार्यरत लगभग 29,600 जल सहिया पिछले 14 वर्षों से ग्रामीण क्षेत्रों में निरंतर सेवा दे रही हैं। इसके बावजूद उन्हें अब तक स्थायी मानदेय एवं उचित पारिश्रमिक नहीं मिल पाया है।

मुख्य मांगें इस प्रकार हैं:

  • मानदेय भुगतान में पारदर्शिता: वर्ष 2019 से 2023 तक 37 माह एवं प्रोत्साहन राशि के 30% भुगतान को लंबित रखा गया है, जिसका शीघ्र भुगतान किया जाए।
  • न्यूनतम मजदूरी के अनुरूप मानदेय: जल सहिया कर्मियों को उनके कार्य के अनुरूप न्यूनतम मजदूरी दर पर मानदेय सुनिश्चित किया जाए।
  • बीमा एवं सुरक्षा: जल सहिया कर्मियों को मृत्यु उपरांत बीमा एवं आयुष्मान योजना से जोड़ा जाए।
  • नगर निकाय में समायोजन: शहरी क्षेत्रों में कार्यरत जल सहिया कर्मियों को नगर निगम में समायोजित किया जाए।
  • नियोजन नीति के तहत नियमितीकरण: जल सहिया कर्मियों को राज्य सरकार की नियोजन नीति के तहत स्थायी किया जाए।
  • मनमाने हटाने पर रोक: बिना स्पष्ट नियमों के जल सहिया कर्मियों को हटाने की प्रक्रिया पर तत्काल रोक लगाई जाए तथा उन्हें मोबाइल रिचार्ज की सुविधा प्रदान की जाए।

संघ के प्रदेश पदाधिकारियों ने कहा कि जल सहिया कर्मी राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में जल आपूर्ति व्यवस्था की रीढ़ हैं, लेकिन उनकी अनदेखी लगातार की जा रही है। वर्तमान में मात्र ₹2000–₹2500 के मानदेय में कार्य करना उनके लिए अत्यंत कठिन हो गया है, जिससे वे आर्थिक संकट का सामना कर रही हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि विभागीय स्तर पर कई बार वार्ता के बावजूद अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकला है, जिससे कर्मियों में भारी असंतोष व्याप्त है।

संघ ने मुख्यमंत्री एवं पेयजल एवं स्वच्छता विभाग से आग्रह किया है कि जल सहिया कर्मियों की मांगों पर गंभीरतापूर्वक विचार करते हुए शीघ्र समाधान सुनिश्चित किया जाए, ताकि हजारों कर्मियों को राहत मिल सके और ग्रामीण जल व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित होती रहे।

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