अफसरों की सुस्ती से गांवो के विकास में लगा ग्रहण, 300 से भी अधिक टेंडर की फाइलें अटकी, सचिव ने 15 जुलाई तक का दिया अल्टीमेटम, मगर विशेषज्ञ बोले – ‘जीरो प्रोग्रेस’ से सीधे ‘शत-प्रतिशत निपटारे’ का दावा हवा हवाई
विशेषज्ञों का कहना है कि जिस काम में महीनों से एक कदम भी आगे नहीं बढ़ाया गया, उसे अचानक विभागीय सचिव की सख्ती के बाद कुछ दिनों में शत-प्रतिशत पूरा करने का दावा व्यावहारिक रूप से तर्कसंगत नहीं है

रांची. झारखंड में ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की योजनाओं को लेटलतीफ़ी का ग्रहण लग गया है। राज्य भर में स्वीकृत ग्रामीण सड़क और पुल निर्माण योजनाओं के 300 से अधिक टेंडर लंबे समय से लंबित हैं। निर्धारित समय-सीमा के भीतर टेंडर निष्पादन नहीं होने से राज्य की कई महत्वपूर्ण विकास योजनाएं बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। इस गंभीर लापरवाही पर ग्रामीण कार्य विभाग ने अब बेहद सख्त रुख अपना लिया है। विभाग ने सभी लंबित टेंडरों का निष्पादन हर हाल में 15 जुलाई तक पूरा करने का निर्देश जारी किया है।
आदिम जनजातियों के विकास के लिए बनी योजनाएं भी लटकी
सरकार ने आदिम जनजातीय क्षेत्रों में बेहतर रोड कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए ‘पीएम जन मन योजना’ के तहत सड़कों की स्वीकृति दी थी। इस योजना के बैच-2 और बैच-3 के तहत 139 सड़कों और 127 पुलों के निर्माण की योजनाएं तैयार की गई थीं। लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से एक भी योजना के लिए अब तक ‘लेटर ऑफ अवार्ड’ जारी नहीं किया गया है और सारे टेंडर पेंडिंग पड़े हैं।
विभाग ने इन योजनाओं के लिए फिर से निकाली गई निविदा का निपटारा हर हाल में 20 जुलाई तक करने की समय-सीमा तय की है। हालांकि, विभागीय इंजीनियरों का दबी जुबान में कहना है कि इस योजना का निपटारा इतने कम समय में होना संशयास्पद है, जिससे यह मामला पूरी तरह फंस सकता है।
1100 से अधिक सड़कों का निकला था टेंडर
ग्रामीण कार्य विभाग और झारखंड स्टेट रूरल रोड डेवलपमेंट अथॉरिटी की ओर से 1100 से अधिक सड़कों का टेंडर निकाला गया था। पीएम जन मन योजना (बैच-1) के लिए कुल 74 पैकेज का टेंडर निकाला गया था (एक पैकेज में 3 से 4 योजनाएं शामिल थीं)। इनमें से 10 पैकेज का टेंडर अब भी पेंडिंग है। मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के अंतर्गत कुल 40 योजनाओं का टेंडर निकाला गया था, जिसमें से 24 टेंडर लंबित रह गए। 1 लाख से 5 करोड़ रुपये तक की कुल 794 योजनाओं का टेंडर निकाला गया था, जिसमें से 47 योजनाएं पेंडिंग की श्रेणी में चली गईं।
सचिव ने जताई नाराजगी, दिए कड़े निर्देश
विभागीय सचिव मनोज कुमार ने जब पीएम जन मन योजना बैच-1, 2 व 3 के साथ-साथ प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना और मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना के टेंडरों की समीक्षा की, तो बड़े पैमाने पर लंबित सामने आई। सचिव ने टेंडर निपटारा कार्य के प्रति असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि किसी भी हाल में टेंडरों को लटकाया नहीं जाना चाहिए था। उन्होंने शत-प्रतिशत टेंडर का निपटारा जल्द से जल्द करने और प्रक्रिया में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। हालांकि विशेषज्ञों का भी कहना है कि जिस काम में महीनों से एक कदम भी आगे नहीं बढ़ाया गया, उसे अचानक विभागीय सचिव की सख्ती के बाद कुछ दिनों में शत-प्रतिशत पूरा करने का दावा करना कागजी तौर पर तो संभव दिख सकता है, लेकिन व्यावहारिक रूप से इसमें जल्दबाजी के कारण गड़बड़ी होने की पूरी आशंका रहती है।
मुख्य अभियंता का आश्वासन: इस पूरे मामले पर विभाग के मुख्य अभियंता मनोहर कुमार ने कहा कि जल्द ही सारी योजनाओं के टेंडर का निपटारा कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि अधिकतम टेंडरों का निष्पादन किया जा चुका है और शेष बचे टेंडरों पर तेजी से काम चल रहा है। जल्द ही निविदा प्रक्रिया पूरी कर धरातल पर निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाएगा। मुख्य अभियंता ने यह भी कहा कि इस बात की जांच की जा रही है कि किन परिस्थितियों में टेंडरों का निष्पादन समय पर नहीं हुआ था, और जल्द ही इसका ठोस हल निकाल लिया जाएगा।



