‘माइंस’ से ‘माइंड्स’ की ओर बढा झारखंड: नई दिल्ली में राष्ट्रीय हितधारक परामर्श 2026 का भव्य समापन, टाटा और गूगल सहित वैश्विक दिग्गजों के साथ 14 MoUs पर मुहर
जियाडा (JIADA) के नियमो में आदिवासियों को 50% तक रियायत देने पर विचार, समावेशी विकास पर सरकार का जोर, मंत्री बोले - उद्योग और पर्यटन से थमेगा पलायन

नई दिल्ली/रांची. झारखंड को सतत प्रगति के मार्ग पर आगे ले जाने और राज्य को देश का अग्रणी निवेश गंतव्य बनाने के उद्देश्य से नई दिल्ली के होटल ताज पैलेस में आयोजित दो दिवसीय ‘राष्ट्रीय हितधारक परामर्श 2026’ का सफलतापूर्वक समापन हो गया। इस उच्चस्तरीय मंथन के समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के समग्र और दीर्घकालिक विकास का एक नया विजन प्रस्तुत किया। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा, झारखंड को ‘माइंस’ से ‘माइंड्स’ की ओर ले जाना हमारा दृढ़ संकल्प है। राज्य में अब सिर्फ नीतियां नहीं, बल्कि असीम संभावनाओं के द्वार खुल रहे हैं।

तकनीकी नवाचार के लिए 14 महत्वपूर्ण समझौते
झारखंड सरकार ने राज्य में डिजिटल गवर्नेंस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने के लिए देश और दुनिया के प्रमुख औद्योगिक घरानों तथा वैश्विक संस्थाओं के साथ कुल 14 महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापनों (MoUs) पर हस्ताक्षर किए हैं। इन साझीदारों में प्रमुख रूप से टाटा समूह, गूगल, जिंदल ग्रुप, वरुण बेवरेजेज, ईज माय ट्रिप, जनरल स्टील और पावर न्यूक्लियर शामिल है।
मुख्यमंत्री ने इन समझौतों को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि यह सिर्फ कागजी समझौता नहीं बल्कि राज्य के उज्ज्वल भविष्य की उपलब्धि है। उन्होंने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि सभी शॉर्ट-टर्म योजनाओं के बजाय लॉन्ग-टर्म पार्टनरशिप पर ध्यान दें और सभी योजनाओं को एक निश्चित समय सीमा के भीतर धरातल पर उतारें।
आदिवासी समाज को मुख्यधारा से जोड़ने की बड़ी पहल
राज्य की आत्मा यानी आदिवासी समाज को विकास के मुख्य धारा पर लाने के लिए मुख्यमंत्री ने एक बड़ा नीतिगत संकेत दिया। उन्होंने जियाडा (JIADA) के नियमों का उल्लेख करते हुए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया कि वर्तमान में आदिवासी समूहों के लिए लागू 25% रियायत के प्रावधान को बढ़ाकर 50% तक करने पर पुनर्विचार किया जाए। इसके साथ ही, मुख्यमंत्री ने अतीत में रही संवाद की कमी को स्वीकार किया और कहा कि अब सरकार देश-विदेश के निवेशकों के साथ निरंतर सीधा संवाद बनाए रखेगी।

औद्योगिक संवर्धन, निवेश और रोजगार सृजन पर मंथन
परामर्श के दूसरे दिन ‘औद्योगिक संवर्धन एवं निवेश’ विषय पर एक विशेष सत्र का आयोजन किया गया, जिसकी अध्यक्षता उद्योग, श्रम, नियोजन, प्रशिक्षण एवं कौशल विकास विभाग के मंत्री संजय प्रसाद यादव ने की। इस सत्र में विशेषज्ञों ने झारखंड के औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। इसमें ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को और बेहतर बनाना, निजी निवेश को आकर्षित करना और औद्योगिक अवसंरचना का विस्तार करना, खनन, विनिर्माण, इस्पात, खाद्य प्रसंस्करण और लॉजिस्टिक्स जैसे पारंपरिक और उभरते क्षेत्रों में अपार संभावनाओं पर विचार विमर्श किया गया। साथ ही नीति की स्थिरता, नवाचार और परियोजनाओं का समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।

उद्योग को झारखंड की आवश्यकता है और झारखंड को उद्योग की
सत्र को संबोधित करते हुए मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि उद्योग और पर्यटन के माध्यम से मुख्यमंत्री और सरकार की यह स्पष्ट सोच है कि झारखंड के भीतर ही ऐसे अवसर पैदा किए जाएं, जिससे यहाँ के युवाओं और नागरिकों को रोजगार व आजीविका के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े। उन्होंने माना कि पर्यटन के क्षेत्र में झारखंड कुछ पीछे रहा है, लेकिन अब सरकार इस दिशा में निरंतर प्रयासरत है। इस महत्वपूर्ण परिचर्चा का संचालन उद्योग, खान एवं भू-तत्व विभाग के सचिव अरवा राजकमल ने किया। पैनल चर्चा में उद्योग जगत के कई शीर्ष दिग्गजों ने अपने विचार साझा किए, जिनमें निवृति राय (प्रबंध निदेशक, इन्वेस्ट इंडिया), वी. के. शर्मा (उपाध्यक्ष, जिंदल समूह), सुंदर रमन (उपाध्यक्ष, टाटा स्टील), सिद्धार्थ रूंगटा (अध्यक्ष, रूंगटा समूह), देवयानी खंखोजे (प्रेसिडेंट–कॉरपोरेट अफेयर्स, वरुण बेवरेजेज लिमिटेड) शामिल रहे।

इस ऐतिहासिक कार्यक्रम के अवसर पर मंत्री दीपिका पांडेय सिंह, मंत्री संजय प्रसाद यादव, मंत्री सुदिव्य कुमार, मंत्री इरफान अंसारी और मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की सहित कई गणमान्य अतिथि, केंद्रीय मंत्री और नीति-निर्माता उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री ने सभी का आभार जताते हुए ‘जोहार’ के साथ अपने संबोधन का समापन किया।



