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झारखंड को स्टील, ऑटोमोबाइल, डिफेंस और टेक्सटाइल का ‘ग्लोबल हब’ बनाने के लिए औद्योगिक और वस्त्र एवं फुटवियर नीति का मसौदा तैयार

डिफेंस से लेकर गारमेंट्स तक झारखंड को निवेश का ग्लोबल हब बनाने की तैयारी, दिल्ली में आयोजित नेशनल स्टेकहोल्डर्स समिट में दिखेगा नीतियों का निवेश तक प्रभाव

रांची. झारखंड सरकार ने राज्य की आर्थिक तकदीर और औद्योगिक तस्वीर को पूरी तरह बदलने के लिए एक साथ दो बेहद महत्वाकांक्षी नीतियों के मसौदे को तैयार कर लिया है। राज्य को देश का प्रमुख मैन्युफैक्चरिंग और टेक्सटाइल केंद्र बनाने के उद्देश्य से ‘झारखंड इंडस्ट्रियल एंड इन्वेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी (JIIPP)-2026’ और ‘झारखंड टेक्सटाइल, अपैरल एंड फुटवियर पॉलिसी-2026’ का खाका तैयार किया गया है।

इन दोनों नीतियों के संयुक्त क्रियान्वयन से राज्य में 1 लाख 01 हजार करोड़ रुपये से अधिक का भारी-भरकम पूंजी निवेश आकर्षित होने तथा प्रत्यक्ष रूप से 45,000 से अधिक नए रोजगार के अवसरों के सृजन का लक्ष्य रखा गया है। दिल्ली में आगामी 8 व 9 जुलाई को आयोजित होने वाले इन्वेस्टर समिट में इन दोनों ऐतिहासिक नीतियों को आधिकारिक रूप से जारी किया जाएगा।

नई औद्योगिक नीति से स्टील, ऑटोमोबाइल और डिफेंस का हब बनेगा झारखंड

सरकार झारखंड को केवल एक पारंपरिक ‘खनन राज्य’ की छवि से बाहर निकालकर तकनीकी और रणनीतिक विनिर्माण का गढ़ बनाना चाहती है। इस नीति का मुख्य लक्ष्य अकेले 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश लाना और कम से कम 25 हजार नए रोजगार पैदा करना है। इसके लिए पूंजी निवेश सब्सिडी, ब्याज सब्सिडी, एसजीएसटी रीइंबर्समेंट और स्टांप ड्यूटी में भारी रियायतें प्रस्तावित हैं। नीति के तहत राज्य में मेडिकल और इंजीनियरिंग संस्थानों को ‘उद्योग’ मानकर 30 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी दी जाएगी। इसके अलावा निजी विश्वविद्यालयों को उनकी NAAC ग्रेडिंग के आधार पर 5 से 12 करोड़ रुपये और मल्टी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल्स को 1 से 10 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता दी जाएगी।

वैश्विक निवेशकों और प्रवासी भारतीयों को आकर्षित करने के लिए एक विशेष एनआरआई सेल और सिंगल विंडो सिस्टम को और मजबूत किया जाएगा। महिला, एससी, एसटी और दिव्यांग उद्यमियों को उद्योग स्थापित करने पर 5 प्रतिशत अतिरिक्त लाभ (अधिकतम 5 करोड़ रुपये) दिया जाएगा।

वस्त्र एवं फुटवियर नीति-2026: परिधान से बनेगी पहचान

झारखंड को पूर्वी भारत का प्रमुख कपड़ा, परिधान और फुटवियर हब बनाने के इरादे से तैयार की गई इस नीति के तहत वस्त्र उद्योग में 1000 करोड़ रुपये के निवेश और 20 हजार नई नौकरियों का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का मुख्य फोकस नॉन-वोवन और टेक्निकल टेक्सटाइल पर है, जिनका इस्तेमाल हेल्थकेयर और इंफ्रास्ट्रक्चर में होता है। टेक्सटाइल कंपनियों को 75 प्रतिशत स्थानीय निवासियों को रोजगार देना होगा। इसके बदले सरकार प्रति पुरुष कर्मचारी 5,000 रुपये और महिला कर्मचारी को 6,000 रुपये प्रति माह की वेतन सब्सिडी सीधे देगी। एससी/एसटी और दिव्यांगों के लिए इसमें 1,000 रुपये अतिरिक्त जोड़े जाएंगे।

झारखंड देश का सबसे बड़ा तसर सिल्क उत्पादक है और झारक्राफ्ट के माध्यम से 2.5 लाख से अधिक बुनकर इससे जुड़े हैं। नई नीति के तहत राज्य के हर जिले में कम से कम एक क्लस्टर आधारित उत्पादन या प्रशिक्षण केंद्र स्थापित किया जाएगा। पात्र वस्त्र इकाइयों को स्थायी पूंजी निवेश पर 20 प्रतिशत तक की सब्सिडी (अधिकतम 50 करोड़ रुपये) और 7 वर्षों तक एसजीएसटी में भारी छूट मिलेगी।

संतुलित विकास के लिए त्रि-स्तरीय ‘ज़ोनिंग’ प्रणाली

झारखंड के पिछड़े जिलों में भी उद्योग पहुंच सकें, इसके लिए पूरी नीति को तीन आर्थिक जोनों में विभाजित किया गया है।

ज़ोन – 1 (विकसित क्षेत्र): रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो और रामगढ़ (यहां कोई अतिरिक्त निवेश सब्सिडी नहीं मिलेगी)।
ज़ोन – 2 (मध्यम विकसित क्षेत्र): हजारीबाग, गिरिडीह, कोडरमा, खूंटी, सरायकेला-खरसावां और देवघर (यहाँ 3 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी मिलेगी)।
ज़ोन – 3 (पिछड़े/आदिवासी क्षेत्र): राज्य के शेष सभी सुदूर जिले (यहाँ निवेश करने वाले उद्योगों को 5 प्रतिशत अतिरिक्त सब्सिडी का लाभ मिलेगा)।

फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (FJCCI) के अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा ने नीति का स्वागत करते हुए कहा कि नई उद्योग नीति में ग्रीन टेक्नोलॉजी, रिन्यूएबल एनर्जी, डायरेक्ट फॉरेन इन्वेस्टमेंट और सिंगल विंडो सिस्टम जैसे दूरदर्शी प्रावधान हैं। जब कोई बड़ी एंकर यूनिट स्थापित होती है, तो उसके साथ कई छोटी एमएसएमई और अनुषंगी इकाइयां भी स्वतः जन्म लेती हैं। इससे जमीनी स्तर पर रोजगार का बड़े पैमाने पर सृजन होता है और राज्य की जीडीपी को नई रफ्तार मिलती है।

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