इतिहास गढ़ने के लिए तैयार रांची, जिस टूर्नामेंट ने कोलकाता को बना दिया ‘फुटबॉल का मक्का’, जानिये उस ऐतिहासिक और प्रतिष्ठित डुरंड कप के बारे में वो सब कुछ, जो आप जानना चाहते है..
साल 1888 में शिमला में सर मोर्टिमर डूरंड द्वारा शुरू किया गया यह टूर्नामेंट सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भारतीय फुटबॉल की जीवित विरासत है।

रांची. राजधानी रांची के इतिहास में एक नया स्वर्णिम अध्याय जुड़ने जा रहा है। दुनिया के तीसरे सबसे पुराने और प्रतिष्ठित फुटबॉल टूर्नामेंट डूरंड कप के 135वें संस्करण की मेजबानी के लिए रांची पूरी तरह तैयार है। मोराबादी स्थित ऐतिहासिक बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम में इस बार फुटबॉल का ऐतिहासिक ‘महाकुंभ’ सजेगा, जहां ग्रुप-सी के घमासान के साथ कुल सात हाई-प्रोफाइल मुकाबले खेले जाएंगे।
टूर्नामेंट का आगाज और रांची का शेड्यूलइस
इस ऐतिहासिक टूर्नामेंट का आधिकारिक आगाज 25 जुलाई 2026 को कोलकाता के सॉल्ट लेक स्टेडियम में 17 बार की चैंपियन मोहन बागान सुपर जायंट्स और 16 बार की विजेता ईस्ट बंगाल एफसी के बीच महामुकाबले से होगा। इसके ठीक अगले दिन यानी 26 जुलाई 2026 से रांची में मैचों का रोमांच शुरू हो जाएगा। रांची के बिरसा मुंडा स्टेडियम में ग्रुप चरण के 6 मुकाबले खेले जाएंगे, जिसमें देश की जानी-मानी टीमें जिनमे जमशेदपुर एफसी (झारखंड की घरेलू टीम), इंडियन आर्मी एफटी, दिल्ली एफसी और डिफेंडर्स एफसी मैदान पर अपनी ताकत दिखाएंगी। इसके बाद 16 अगस्त को रांची में एक नॉकआउट क्वार्टर फाइनल मुकाबला भी खेला जाएगा, जो स्थानीय प्रशंसकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण होगा।
प्रशासन अलर्ट, सुरक्षा, यातायात और बुनियादी ढांचे पर विशेष जोर
पहली बार रांची में आयोजित हो रहे इतने बड़े स्तर के फुटबॉल आयोजन को लेकर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। इस संबंध में उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की गई। बैठक में सुरक्षा व्यवस्था, सुदृढ़ कानून-व्यवस्था, क्राउड मैनेजमेंट, ट्रैफिक डायवर्जन, पर्याप्त पार्किंग और आकस्मिक चिकित्सा सेवाओं पर विस्तृत खाका तैयार किया गया। उपायुक्त ने स्टेडियम में निर्बाध पेयजल, स्वच्छता और दर्शकों की उच्च सुविधाओं को सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
डूरंड कप की ऐतिहासिक विरासत और इसकी खासियत
साल 1888 में शिमला में सर मोर्टिमर डूरंड द्वारा शुरू किया गया यह टूर्नामेंट सिर्फ एक खेल प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भारतीय फुटबॉल की जीवित विरासत है। डूरंड कप की कुछ बेहद अनूठी विशेषताएं इसे दुनिया के अन्य सभी टूर्नामेंटों से अलग करती हैं। इस प्रतियोगिता में विजेता टीम को एक साथ तीन ट्रॉफियां दी जाती हैं। मूल डूरंड कप, शिमला ट्रॉफी, और प्रेसिडेंट्स कप (1950 में प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा शुरू)। भारतीय सशस्त्र बलों के सहयोग से आयोजित होने के कारण इसमें सेना का अनुशासन, शौर्य और देशभक्ति का अद्भुत सामंजस्य देखने को मिलता है। इस साल विजेता टीम के लिए ₹1.21 करोड़ और उपविजेता के लिए ₹60 लाख की भारी प्राइज मनी के साथ-साथ शानदार व्यक्तिगत पुरस्कार खिलाड़ियों को दिए जाएंगे। कोलकाता जैसे पारंपरिक फुटबॉल गढ़ के बाद अब रांची को यह सह-मेजबानी मिलना राज्य के खेल परिदृश्य को पूरी तरह बदल कर रख देगा। अंतरराष्ट्रीय और आईएसएल (ISL) स्तर की टीमों की मेजबानी के लिए बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम की पिच, ड्रेनेज, फ्लड लाइट्स और प्लेयर्स पवेलियन को विश्वस्तरीय मानकों पर अपग्रेड किया जा रहा है। यह ढांचागत सुधार भविष्य में झारखंड के स्थानीय एथलीटों और मैचों के लिए भी एक बड़ी संपत्ति साबित होगा।
झारखंड के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों में फुटबॉल को लेकर हमेशा से असीम दीवानगी रही है। जब स्थानीय युवा अपनी आंखों के सामने देश के शीर्ष आईएसएल क्लब जमशेदपुर एफसी और दिल्ली एफसी के खिलाड़ियों तथा भारतीय सेना के जवानों को आपस में भिड़ते देखेंगे, तो उनमें खेल के प्रति एक नया करियर विकल्प और प्रेरणा जागेगी। लगभग एक महीने तक चलने वाले इस बड़े आयोजन के कारण देश भर से खेल प्रेमी, मीडिया कर्मी, वीआईपी और अधिकारी रांची पहुंचेंगे। क्रिकेट और नेशनल गेम्स के बाद डूरंड कप के मैचों का नेशनल टीवी और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लाइव टेलीकास्ट होने से रांची की पहचान एक बहु-आयामी स्पोर्ट्स हब के रूप में स्थापित होगी। यह देश भर में झारखंड की सकारात्मक, प्रगतिशील और खेल-प्रेमी छवि को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा।



