
नयी दिल्ली/रांची. चुनाव आयोग ने राज्यसभा की 24 सीटों पर आज चुनाव की घोषणा कर दी है। इसी क्रम में झारखंड की दो राज्यसभा सीटों पर भी चुनाव होंगे। मतदान 18 जून 2026 को कराया जाएगा और उसी दिन मतगणना के बाद परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे। झारखंड में इस बार चुनाव काफी दिलचस्प माना जा रहा है, क्योंकि राज्य की दो सीटें खाली हैं। एक सीट पूर्व मुख्यमंत्री और दिवंगत झामुमो संस्थापक शिबू सोरेन के निधन के बाद रिक्त हुई थी, जबकि दूसरी सीट पर बीजेपी सांसद दीपक प्रकाश का कार्यकाल जून 2026 में समाप्त हो रहा है।
राजनीतिक रूप से देखा जाए तो झारखंड में सत्तारूढ़ गठबंधन झामुमो-कांग्रेस के पास संख्या बल मजबूत है, इसलिए दोनों सीटें महागठबंधन के खाते में जाने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, सीट बंटवारे को लेकर झारखण्ड मुक्ति मोर्चा और कांग्रेस के बीच अंदरूनी खींचतान भी सामने आ रही है। कांग्रेस एक सीट पर दावा कर रही है, जबकि जेएमएम दोनों सीटों पर उम्मीदवार उतारने की रणनीति बना रही है।
वहीं बीजेपी भी इस चुनाव को प्रतिष्ठा की लड़ाई मानकर रणनीति तैयार कर रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर महागठबंधन में मतभेद बढ़ते हैं तो बीजेपी क्रॉस वोटिंग या रणनीतिक उम्मीदवार के जरिए मुकाबले को रोचक बना सकती है।
विधानसभा का मौजूदा अंकगणित
झारखंड विधानसभा के वर्तमान आंकड़ों के लिहाज से एक सीट पर जीत दर्ज करने के लिए किसी भी उम्मीदवार को न्यूनतम 28 प्रथम वरीयता के वोटों (विधायकों का समर्थन) की आवश्यकता होगी। वर्तमान में झामुमो, कांग्रेस, राजद और वामदलों को मिलाकर सत्ता पक्ष के पास कुल 56 विधायकों का भारी संख्या बल है। इसमें अकेले झामुमो के पास 34 और कांग्रेस के पास 16 विधायक हैं। विपक्षी खेमे के पास कुल 24 विधायक हैं, जिसमें भारतीय जनता पार्टी के 21, आजसू के 1, जेडीयू के 1 और एलजेपी के 1 विधायक शामिल हैं।
तकनीकी और गणितीय रूप से 56 विधायकों के साथ इंडिया गठबंधन दोनों सीटों को आसानी से (28 + 28 = 56) जीतने की क्षमता रखता है, जबकि भाजपा/एनडीए अपने दम पर एक भी सीट के जादुई आंकड़े (28) तक नहीं पहुंच पा रही है।



