
रांची। मंगलवार को हेमंत सोरेन सरकार ने 25-26 नवंबर को खनिज विधेयक और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर उत्पन्न मौजूदा परिस्थितयो को लेकर विस्तृत चर्चा की आवश्यकता है। इसी उद्देश्य से विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने का निर्णय लिया गया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विधानसभा में चर्चा के दौरान राज्य सरकार पूरे विषय पर अपना पक्ष मजबूती से रखेगी। झारखण्ड मुक्ति मोर्चा और सरकार के शामिल अन्य दल शुरू से खनिज विधेयक और एसआइआर के खिलाफ मुखर विरोध दर्ज कराते रहे है, मगर ऐसा पहली बार है, जब राज्य सरकार ने खनिज विधेयक और विशेष गहन पुनरीक्षण के खिलाफ सर्वदल सहमति पर बल दिया है।
राज्य सरकार द्वारा विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के निर्णय को भाजपा ने सरकार की बौखलाहट बताया है। बीजेपी के प्रदेश प्रवक्ता केके गुप्ता ने कहा कि हेमन्त सरकार कैबिनेट से MMDR संसोधन बिल और SIR के विरोध में झारखंड विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर प्रस्ताव पास कराने की तैयारी पूर्णतः संघीय ढांचा पर प्रहार है। के के गुप्ता ने कहा कि विधानसभा को हेमन्त सरकार केन्द्र विरोधी राजनीति का मंच बनाकर जनता में भ्रम की स्थिति पैदा करना चाहती है। पहले सरकार को जनता को अपने 7 वर्ष के कार्यकाल में खनिज और खनन का पूरा हिसाब- किताब सार्वजनिक करनी चाहिए। सरकार को यह बताना चाहिए कि झारखण्ड की खनन नीति क्या है, खनन से राजस्व प्राप्ति की क्या स्थिति है, खनन उत्पादन का प्रदर्शन एवं इसके अलोक में विनियमन का पुरा लेखा जोखा प्रस्तुत करता चाहिए।

के के गुप्ता ने कहा कि सरकार को यह भी बताना चाहिए कि इन सात वर्षो में केन्द्र से कितने खनिज क्षेत्र आवंटित हुए और उसके अलोक में कितने खनिज क्षेत्र की नीलामी हुई और कितने में खनन उत्पादन जारी है या कितने में बंद है, अभी शुरू नहीं हुए। भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि हेमन्त सरकार अपनी विफलताओं का ठीकरा केन्द्र सरकार पर फोड़कर झारखण्ड की जनता की झूठी सहानुभूति लेना चाहती है।



