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झारखंड कौशल विकास मिशन पर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप, नेता प्रत्पक्ष बाबूलाल मरांडी ने सीएम हेमंत सोरेन को पत्र लिख की निष्पक्ष तथा न्यायिक जाँच की मांग

झारखंड की राजनीति में एक बार फिर भ्रष्टाचार पर भूचाल आ गया है। नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर 'झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी' (JSDMS) में करोड़ों रुपये के वित्तीय घोटाले को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग की है।

रांची. झारखंड की राजनीति में एक बार फिर भ्रष्टाचार पर भूचाल आ गया है। नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पत्र लिखकर ‘झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी’ (JSDMS) में करोड़ों रुपये के वित्तीय घोटाले को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। पत्र में मरांडी ने नियमों की अनदेखी कर ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को अवैध रूप से करोड़ों रुपये भुगतान करने का आरोप लगाते हुए इस पूरे प्रकरण की न्यायिक जाँच कराने, दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और सीएजी (CAG) से विशेष ऑडिट कराने की मांग की है।

क्या है पूरा मामला?

बाबूलाल मरांडी द्वारा सौंपे गए दस्तावेजों के अनुसार, JSDMS में फर्जी बैंक गारंटी और वित्तीय अनियमितता का यह खेल सुनियोजित तरीके से खेला गया। 1 अगस्त 2024 को तत्कालीन मिशन निदेशक द्वारा छह कंपनियों को फर्जी बैंक गारंटी प्रस्तुत करने का दोषी पाते हुए 7 अगस्त 2026 तक के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया गया था। इस आदेश के महज कुछ ही दिनों बाद, 14 अगस्त 2024 को वर्तमान मिशन निदेशक शैलेंद्र लाल द्वारा कथित तौर पर लोकहित का हवाला देते हुए नियमों की घोर अनदेखी की गई और इन ब्लैकलिस्टेड कंपनियों को काली सूची से बाहर निकाल दिया गया। साथ ही उनके भुगतान का आदेश भी पारित कर दिया गया।

प्रतिबंध हटने के तुरंत बाद विभाग द्वारा इन दागी कंपनियों को लगभग 55 करोड़ रुपये का भारी-भरकम भुगतान आनन-फानन में कर दिया गया। सबसे चौंकाने वाला मोड़ अगस्त 2025 में आया। फर्जी बैंक गारंटी मामले में जब राज्य के तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय चौबे की गिरफ्तारी हुई, तो उसी प्रकरण के बाद इन्हीं कंपनियों को विभाग द्वारा दोबारा ब्लैकलिस्ट कर दिया गया।

मरांडी ने अपने पत्र में सीधे तौर पर प्रशासनिक और राजनीतिक सांठगांठ की ओर इशारा करते हुए कई सवाल उठाये हैं। जब कंपनियां फर्जी बैंक गारंटी देने की सीधे तौर पर दोषी थीं, तो उन्हें ब्लैकलिस्ट से बाहर निकालने का आदेश किसके स्तर पर और किस नियम के तहत दिया गया? लगभग 55 करोड़ रुपये के भुगतान की अनुमति किस अधिकारी ने और किस स्तर से प्रदान की? यदि इसी फर्जी बैंक गारंटी मामले में उत्पाद विभाग के सचिव के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई हो सकती है, तो श्रम विभाग के तत्कालीन एवं वर्तमान सचिवों पर अब तक कार्रवाई क्यों नहीं हुई? क्या इस पूरे खेल को किसी प्रभावशाली राजनीतिक अथवा प्रशासनिक संरक्षण के कारण अंजाम दिया गया?

नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री से फर्जी बैंक गारंटी देने वाली कंपनियों, श्रम विभाग के तत्कालीन व वर्तमान सचिव, संबंधित अधिकारियों तथा अन्य दोषियों के खिलाफ तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई शुरू करने की मांग की है। मरांडी ने झारखंड कौशल विकास मिशन सोसाइटी के वर्ष 2023-24 से लेकर अब तक के सभी वित्तीय और प्रशासनिक निर्णयों का भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक अथवा किसी अन्य निष्पक्ष स्वतंत्र एजेंसी से ऑडिटकराने की मांग भी की है।

मरांडी ने इस पूरे मामले में शामिल अधिकारियों की भूमिका और उनकी संपत्तियों की भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) से विशेष जाँच कराने की मांग की है, साथ ही जाँच पूरी होने तक संबंधित कंपनियों को किसी भी प्रकार का नया कार्य आदेश, भुगतान अथवा सरकारी अनुबंध देने पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है।

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