
Ranchi. रांची का हेवी इंजीनियरिंग कॉर्पोरेशन सिर्फ एक कंपनी या फैक्ट्री नहीं है, बल्कि यह आधुनिक भारत के औद्योगिक विकास का वो पहला बड़ा मील का पत्थर था जिसने देश को ‘आत्मनिर्भर’ बनाने की नींव रखी थी। इसे “मदर ऑफ ऑल इंडस्ट्रीज” (उद्योगों की जननी) कहा जाता है, क्योंकि इसका मकसद ऐसी मशीनें बनाना था जो आगे चलकर दूसरी फैक्ट्रियां खड़ी कर सकें। मगर आज वहीं एचईसी अपनी बदहाली के कारण दोबारा खड़ा होने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है। देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू जब एचईसी के उद्घाटन के लिए रांची आए थे, तो इसकी भव्यता और देश के भविष्य में इसके महत्व को देखते हुए ही उन्होंने इसे “आधुनिक भारत का मंदिर” कहा था। मगर आज वहीं मंदिर अपनी पहचान, अस्तित्व और पुनर्जागरण की प्रतीक्षा में खड़ा है।
एचईसी की आर्थिक स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि इसके भारी घाटे को देखते हुए अन्य कंपनियां भी इसमें निवेश करने से पीछे हट रही हैं। केंद्र सरकार के पास अब एचईसी को बचाने के विकल्प लगातार कम होते जा रहे हैं। कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में हुई उच्च स्तरीय बैठक में घाटे में चल रहे और बंदी के कगार पर पहुंचे सार्वजनिक उपक्रमों को लेकर गंभीर चर्चा की गई है। इधर समय पर उपकरणों या मशीनरी की आपूर्ति नहीं करने के कारण इसरो ने एचईसी को दिया गया तीसरे मोबाइल लॉन्चिंग पैड का महत्वपूर्ण कार्यादेश रद्द कर दिया है। कोल इंडिया की सहायक कंपनी एनसीएल (NCL) ने भी आपूर्ति और काम में देरी के चलते एचईसी को ब्लैकलिस्ट (काली सूची में दर्ज) कर दिया है। कंपनी के ऊपर वित्तीय घाटा और देनदारियां भी बढ़ती जा रही है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में एचईसी को 226.99 करोड़ का घाटा हुआ था। वर्तमान में कंपनी पर 2000 करोड़ से अधिक की कुल देनदारी (कर्ज/बकाया) हो चुकी है। अपना वर्चस्व बचाने के लिए एचईसी के पास जो जमीन का दायरा था, वह भी सिकुड़ता जा रहा है। एचईसी के पास शुरुआत में कुल 7199 एकड़ जमीन थी, जिसमें से अब केवल 3666 एकड़ जमीन ही बची है। बची हुई जमीन में से 2342 एकड़ राज्य सरकार को, 158 एकड़ सीआईएसएफ (CISF) को और 647 एकड़ स्मार्ट सिटी परियोजना को दी जा चुकी है। इसके अलावा, 73.05 एकड़ जमीन पर अवैध अतिक्रमण है। हालत ये है कि एचईसी के श्रमिक लगातार महीनो से बकाया वेतन के लिए आंदोलन कर रहे है, मगर एचईसी के पास उन्हें देने के लिए फूटी कौड़ी नहीं है।
कभी उद्योगों की जननी कहलाती थी एचईसी..
- भारत सरकार ने 1958 में एचईसी की स्थापना की, इसका उद्देश्य भारत को भारी इंजीनियरिंग के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना था।
- एचईसी का निर्माण तत्कालीन सोवियत संघ (USSR) और चेकोस्लोवाकिया के तकनीकी सहयोग से किया गया था।
- भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू ने एचईसी को आधुनिक भारत का “नए मंदिर” कहा था।
- एचईसी को करीब 2100 एकड़ से अधिक के क्षेत्र में विस्तारित गया, जिसके मुख्य रूप से तीन बड़े प्लांट हैं, जो अपने आप में एचईसी की विशालता का प्रमाण है
केंद्र सरकार ने सभी मंत्रालयों और विभागों को घाटे में चल रही सार्वजनिक क्षेत्र की ऐसी कंपनियों को लेकर एक नई कार्ययोजना बनाने का निर्देश दिया है, जिनमें विनिवेश किया जाना है।



