
रांची. समंदर की तूफानी और दानवाकार लहरें, सड़कों पर बिखरा हुआ मलबे का ढेर और ताश के पत्तों की तरह उखड़ कर जमीन पर गिरे विशालकाय पेड़। बंगाल की खाड़ी में उठे भीषण चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ ने जब आंध्र प्रदेश और यानम के तटीय इलाकों को पार किया, तो बस्तियों का सुकून मलबे में दफ़्न हो गया। हवाओं के इस खौफनाक तांडव ने हर तरफ तबाही का मंज़र लिख दिया है। चक्रवात के रास्ते में जो भी आया, वह रेत के टीले या कंकड़ की तरह बिखर गया।
तूफान ने बापटला और विशाखापत्तनम के बीच, यानम के दक्षिण में तट को जब पार किया, उस दौरान इसकी रफ्तार 125 से 135 किलोमीटर प्रति घंटे तक रही, जबकि झोंकों की रफ्तार 150 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है। इस भयंकर चक्रवात के असर से काकीनाडा, मछलीपट्टनम और विशाखापत्तनम जैसे इलाकों में समंदर का खारा पानी रिहायशी बस्तियों और घरों के अंदर तक घुस गया। बिजली के खंभे क्षतिग्रस्त हुए, और सड़कों पर गिरे पेड़ों तथा मलबों ने आवाजाही में मुश्किलें पैदा कर दीं है।
आंध्र प्रदेश के तट से टकराने के बाद अर्नब की ताकत में धीरे-धीरे भले ही कमी आने की संभावना है, लेकिन इसका मतलब यह कतई नहीं कि खतरा टल गया है। अब यह चक्रवात कमजोर होकर एक गहरे निम्न दबाव में तब्दील होते हुए उत्तर और पूर्वी भारत के आंतरिक इलाकों की तरफ बढ़ रहा है। मौसम विभाग के अनुसार, इसका असर छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड में साफ तौर पर देखा जा रहा है। दक्षिण ओडिशा और छत्तीसगढ़ के कई जिलों में मूसलाधार बारिश का दौर शुरू हो चुका है। कई इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है, जिसके चलते प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। चक्रवात के प्रभाव से आज देर शाम तक झारखण्ड में इसके पूरी तरह दस्तक देने की प्रबल संभावना है। राजधानी रांची समेत खूंटी, सिंहभूम, गुमला और बोकारो समेत कई जिलों में सुबह से ही काले बादलों का डेरा है और रुक-रुक कर बारिश जारी है। एहतियात के तौर पर कई जिलों में स्कूलों को बंद कर दिया गया है और आम जनजीवन को सुरक्षित रहने की सलाह दी गई है।
रांची में जिला प्रशासन अलर्ट
रांची में उपायुक्त मंजुनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में बैठक हुई। इसमें चक्रवाती तूफान ‘अर्नब’ के कारण रांची में 28 और 29 अक्टूबर को भारी बारिश, तेज हवाएं, आंधी-तूफान और वज्रपात की संभावना पर तैयारियों की समीक्षा की गयी। भारत मौसम विज्ञान विभाग ने इन दोनों दिनों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। 50-60 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं, जिससे जलजमाव, पेड़ गिरने और कमजोर मकानों को नुकसान हो सकता है।
इस संभावित आपदा स्थिति से निपटने के लिए उपायुक्त मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में जिला आपदा समिति की बैठक आयोजित की गई। जिला प्रशासन ने जनता से अपील की है कि 28 एवं 29 अक्टूबर को अनावश्यक यात्रा से बचें, तेज हवा एवं वज्रपात के दौरान खुले में न रहें, क्षतिग्रस्त बिजली के तारों अथवा गिरते पेड़ों के निकट न जाएं तथा मौसम विभाग एवं जिला प्रशासन द्वारा जारी सूचनाओं पर ध्यान दें।
बैठक में जिला नोडल पदाधिकारी आपदा प्रबंधन सह अपर समाहर्ता रांची रामनारायण सिंह, जिला शिक्षा पदाधिकारी, जिला शिक्षा अधीक्षक तथा संबंधित विभागों के पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।



