14वीं जेपीएससी सत्याग्रह का आज दसवां दिन, रांची में सीआईडी की ताबड़तोड़ छापेमारी, बीजेपी ने कहा – सीआईडी फ्रेंडली मैच खेलना बंद करे, एल. ख्यांगते को तत्काल गिरफ्तार करे
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि भाजपा की स्पष्ट मांग है कि हेमंत सरकार के साढ़े छह वर्षों से ज्यादा के कार्यकाल में आयोजित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की सीबीआई जांच कराई जाए।

रांची. 14वीं जेपीएससी की प्रारंभिक परीक्षा रद्द करने और मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग को लेकर जारी छात्रों का सत्याग्रह आज दसवां दिन भी जारी रहा। छात्र जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में अपनी मांगो को लेकर प्रदर्शन कर रहे है। इधर, 14वीं जेपीएससी गड़बड़ी मामले में आज सीआईडी ने रांची के धुर्वा, नामकुम समेत 15 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। गिरफ्तार अभय तिवारी की निशानदेही और पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष एल ख्यांग्ते से पूछताछ के आधार पर सीआईडी ने देर रात रवि नामक एक कोचिंग संचालक के घर पर छापेमारी की, मगर रवि घर पर मौजूद नहीं था। उसकी पत्नी घर पर मौजूद थी। सुबह जब सीआईडी की टीम दोबारा छापेमारी के लिए पहुंची तो रवि के घर में ताला लगा था और पत्नी भी फरार थी।
जेपीएससी के सभी सदस्यों को बर्खास्त करे सरकार
भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि भाजपा की स्पष्ट मांग है कि हेमंत सरकार के साढ़े छह वर्षों से ज्यादा के कार्यकाल में आयोजित सभी प्रतियोगी परीक्षाओं की सीबीआई जांच कराई जाए। राज्य के शिक्षा मंत्री यानी मुख्यमंत्री को अविलंब इस्तीफा देना चाहिए। प्रतुल ने कहा कि पूरे आयोग पर गंभीर आरोप लगे हैं तो सभी सदस्यों को बर्खास्त कर पारदर्शी तरीके से नई नियुक्तियां होनी चाहिए।

सीआईडी फ्रेंडली मैच खेलना बंद करे : प्रतुल शाहदेव
प्रतुल शाहदेव ने कहा कि पूर्व जेपीएससी अध्यक्ष एल. ख्यांगते के विरुद्ध गंभीर तथ्य सामने आने के बावजूद उनकी गिरफ्तारी नहीं होना यह साबित करता है कि सीआईडी फ्रेंडली मैच खेल रही है और सिर्फ छोटी मछलियों को गिरफ्तार कर रही है। भाजपा इसका कड़ा विरोध करती है। जब तक आयोग के शीर्ष पदों पर बैठे लोगों से रिमांड में कड़ाई से पूछताछ नहीं होगी, तब तक सच सामने नहीं आएगा। उन्होंने कहा कि ख्यांग्ते ने ही तत्कालीन सहायक परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता का स्थानांतरण होने के बाद भी उन्हें विधिवत कार्यमुक्त नहीं किया गया। खियांगते ने अकेले परीक्षा परिणाम पर हस्ताक्षर किए। ब्लैकलिस्टेड एजेंसी का चयन किया।उन्होंने कहा कि झारखंड लोक सेवा आयोग (प्रक्रिया) नियमावली, 2002 तथा भारत के संविधान के अनुच्छेद 315, 316 एवं विशेष रूप से अनुच्छेद 320 स्पष्ट करते हैं कि निजी एजेंसी को केवल तकनीकी एवं सहायक कार्यों के लिए सीमित रूप से लगाया जा सकता है।
#WATCH | Delhi | On Jharkhand students protesting over JPSC, JSSC exam alleged irregularities, BJP MP Nishikant Dubey says, “Their demand is justified, stating that in the last 7-8 years there has been nepotism and corruption in JPSC. The youth of Jharkhand are not able to get… pic.twitter.com/nuuRKuDJEN
— ANI (@ANI) August 3, 2026
परीक्षा का संचालन, प्रश्नपत्रों की गोपनीयता, मूल्यांकन, मेरिट सूची तैयार करना तथा अंतिम चयन करना झारखंड लोक सेवा आयोग का मूल संवैधानिक एवं वैधानिक दायित्व है। इन अधिकारों का किसी निजी कंपनी को हस्तांतरण कानून और संविधान, दोनों की भावना के विपरीत है।उन्होंने कहा कि यदि निजी एजेंसियों को आयोग के मूल अधिकारों में हस्तक्षेप करने दिया गया है, तो यह केवल प्रक्रिया की त्रुटि नहीं, बल्कि संवैधानिक व्यवस्था के साथ गंभीर खिलवाड़ है। ऐसी स्थिति में केवल कुछ कर्मचारियों की गिरफ्तारी से काम नहीं चलेगा।



