
रांची: झारखंड आंदोलन के महानायक और आदिवासी अधिकारों के लिए अपना जीवन न्योछावर कर देने वाले झारखंड मुक्ति मोर्चा के संस्थापक नेता स्वर्गीय दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में शामिल पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। नई दिल्ली में आयोजित सम्मान समारोह में स्वर्गीय शिबू सोरेन की पत्नी रुपी सोरेन को ने यह सम्मान ग्रहण किया। इस दौरान दिवंगत शिबू सोरेन की बहु कल्पना सोरेन और बेटी अंजली सोरेन भी मौजूद रही। शिबू सोरेन को पद्म भूषण के सम्मान से सम्मानित किये जाने का पल उनके परिवार के साथ-साथ पूरे आदिवासी समाज के लिए गौरव का पल था। गुरूजी शिबू सोरेन को मिले सम्मान को सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने झारखंड और झारखंडियों के लिए गर्व का विषय बताया।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने दिवंगत दिशोम गुरु शिबू सोरेन जी को मरणोपरांत देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किए जाने पर प्रसन्नता जाहिर की है। साथ ही उन्होंने इसके लिए नरेंद्र मोदी सरकार का आभार भी व्यक्त किया है। आदित्य साहू ने कहा कि महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू द्वारा प्रदान किया गया यह सम्मान उनके आजीवन संघर्ष, जनसेवा, आदिवासी अधिकारों की रक्षा तथा सामाजिक न्याय के प्रति समर्पण का राष्ट्रीय सम्मान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश उन महान विभूतियों के योगदान को उचित सम्मान दे रहा है, जिन्होंने समाज और राष्ट्र के निर्माण में अमूल्य भूमिका निभाई है। यह उसी कड़ी का हिस्सा है।
श्री साहू ने कहा कि झारखंड आंदोलन के प्रणेता, आदिवासी समाज की आवाज़, जननायक एवं दिशोम गुरु शिबू सोरेन को सम्मानित किया जाना समस्त झारखंडवासियों के लिए गर्व और सम्मान का विषय है। यह सम्मान केवल स्वर्गीय शिबू सोरेन जी को ही नहीं, बल्कि झारखंड की जनजातीय अस्मिता, संघर्षशील परंपरा और गौरवशाली विरासत को भी समर्पित है। शिबू सोरेन केवल एक परिवार, एक समुदाय के नेता नहीं बल्कि पूरे झारखंड के नेता थे। उन्होंने आजीवन शराबबंदी, महाजनी प्रथा, दहेज के खिलाफ संघर्ष किया।
वहीं, झारखंड मुक्ति मोर्चा के महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने देश के महान जननायक, झारखंड आंदोलन के प्रमुख शिल्पकार और दिशोम गुरु शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्मभूषण सम्मान दिए जाने पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे झारखंड की जनता, आदिवासी समाज और अलग राज्य आंदोलन से जुड़े लाखों लोगों के संघर्ष का सम्मान बताया है। उन्होंने कहा कि दिशोम गुरु का संपूर्ण जीवन जल, जंगल, जमीन, आदिवासी अस्मिता, सामाजिक न्याय और वंचित समुदायों के अधिकारों की रक्षा के लिए समर्पित रहा। नेमरा गांव से शुरू हुआ उनका संघर्ष झारखंड राज्य निर्माण तक पहुंचा और उन्होंने अपने अदम्य साहस, नेतृत्व क्षमता तथा जनसमर्पण के बल पर करोड़ों लोगों की आकांक्षाओं को आवाज दी।
श्री पांडेय ने कहा कि राष्ट्रपति भवन में आयोजित समारोह में गुरुजी की धर्मपत्नी रूपी सोरेन द्वारा यह सम्मान ग्रहण किया जाना पूरे झारखंड के लिए गर्व और भावुक कर देने वाला क्षण है। यह सम्मान केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि उस विचार, आंदोलन और संघर्ष की विरासत का सम्मान है, जिसने झारखंड को उसकी अलग पहचान दिलाई।
उन्होंने कहा कि पद्मभूषण सम्मान से राष्ट्र ने गुरुजी के ऐतिहासिक योगदान को स्वीकार किया है, लेकिन यह गौरव और भी बड़ा होता यदि देश उन्हें भारत रत्न से सम्मानित करता। गुरुजी का सामाजिक, राजनीतिक और मानवीय योगदान इतना व्यापक और ऐतिहासिक है कि वे भारत के सर्वोच्च नागरिक सम्मान के वास्तविक हकदार हैं। शिबू सोरेन ने केवल झारखंड राज्य निर्माण का नेतृत्व नहीं किया, बल्कि आदिवासी समाज, किसानों, मजदूरों और समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों के अधिकारों के लिए आजीवन संघर्ष किया। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत है और उनके विचार सदैव समाज को दिशा देते रहेंगे।
उन्होंने केंद्र सरकार से पुनः आग्रह किया कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन के राष्ट्र निर्माण, सामाजिक न्याय और जनकल्याण में अप्रतिम योगदान को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न से सम्मानित करने पर गंभीरता से विचार किया जाए।



