दुर्भाग्य: करोडो की लागत से बनी कांटाटोली फ्लाईओवर की 64 दुकानें बन गयी कबाड़, दुर्गन्ध, गंदगी और नशेड़ियों का अड्डा बनकर रह गयी गरीब दुकानदारों की आस, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने किया था फ्लाईओवर का उद्घाटन
रांची नगर निगम की विफलता का स्मारक बनी 64 दुकाने, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के विजन पर लगा विभागों की लापरवाही का ग्रहण

रांची. रांची के कांटाटोली फ्लाईओवर के नीचे करोडो की लागत से निर्मित 64 दुकानों का आवंटन फिलहाल ठंडे बस्ते में चला गया है। दुकानों के निर्माण के बाद अब नगर निगम को एहसास हुआ है कि यदि इन दुकानों को संचालित किया गया तो फ्लाईओवर के दोनों ओर भारी ट्रैफिक जाम की समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसी आशंका के चलते ट्रैफिक पुलिस ने दुकानों के आवंटन पर आपत्ति दर्ज कराई, जिसके बाद पूरी प्रक्रिया रोक दी गई है।
यह मामला केवल 64 दुकानों का नहीं, बल्कि सरकारी योजनाओं में दूरदर्शिता और समन्वय की कमी का प्रतीक बन गया है। सवाल उठ रहे हैं कि जब फ्लाईओवर के नीचे व्यावसायिक परिसर विकसित करने की योजना बनाई गई थी, तब ट्रैफिक प्रबंधन, पार्किंग व्यवस्था और सड़क चौड़ीकरण जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार क्यों नहीं किया गया? बिना किसी ठोस दूरदर्शी योजना के तैयार की गई इस परियोजना को अब ‘सफेद हाथी’ ही माना जा रहा है।
कांटाटोली फ्लाईओवर के दोनों किनारों पर 32-32 दुकानें बनाई गई हैं। इन दुकानों के आवंटन के लिए नगर निगम विज्ञापन जारी करने की तैयारी में था। इसी दौरान ट्रैफिक पुलिस ने आपत्ति जताते हुए कहा कि दुकानों के संचालन से सड़क किनारे अनियंत्रित पार्किंग होगी, जिससे पहले से व्यस्त सर्विस रोड और अधिक संकरी हो जाएगी। ट्रैफिक पुलिस की आपत्ति के बाद नगर निगम ने आवंटन प्रक्रिया फिलहाल रोक दी है और अब दोनों विभागों के बीच समाधान तलाशने की कवायद शुरू हुई है।
नगर निगम और जुडको की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी व्यावसायिक परियोजना को विकसित करने से पहले ट्रैफिक इम्पैक्ट असेसमेंट, पार्किंग प्लान और नागरिक सुविधाओं का विस्तृत अध्ययन आवश्यक होता है। लेकिन कांटाटोली फ्लाईओवर के मामले में ऐसा प्रतीत होता है कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद इन पहलुओं पर विचार किया जा रहा है। यही कारण है कि करोड़ों रुपये खर्च कर तैयार की गई दुकानें आज उपयोग से पहले ही विवादों में घिर गई हैं।

मुख्यमंत्री ने दिया था आवंटन का निर्देश
पूर्व में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने फ्लाईओवर के नीचे बनी दुकानों का आवंटन कर स्थानीय लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने का निर्देश दिया था। कई दुकानदार भी आवंटन की उम्मीद लगाए बैठे थे। लेकिन अब नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस के आपसी खींचतान के कारण पूरा मामला अटक गया है। यदि परियोजना के प्रारंभिक चरण में ही ट्रैफिक पुलिस, शहरी योजनाकारों और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित किया जाता, तो आज यह स्थिति पैदा नहीं होती।
बद से बदत्तर हालत में है दुकानें
कांटाटोली फ्लाईओवर के नीचे बाजार बसाने का सपना अब ट्रैफिक पुलिस और नगर निगम की लापरवाही से खटाई में जाता दिख रहा है। हालत ये है कि करोडो की लागत से निर्मित ये दुकानें अब पूरी तरह बदहाल और जर्जर स्थिति में है। कहीं पानी टपक रहा है तो कहीं इतनी गन्दगी पसरी है कि राहगीरों का यहाँ से गुजरना मुश्किल हो गया है। शाम ढलते ही इन वीरान और खंडहर बन चुके ढांचे के अंदर नशेड़ियों, जुवाडियो का अड्डा जमने लगता है।

स्थानीय लोग बताते है कि कुछ असामाजिक तत्व इन खंडहर बन चुके ढांचों के अंदर गलत काम को भी सन्नाटे की आड़ में अंजाम देते है। बंजारों ने अवैध रूप से बहुबाजार के पास कुछ दुकानों में कब्जा भी कर लिया है, और इन दुकानों को शौचालय के रूप में इस्तेमाल कर रहे है। मगर इन दुकानों के लिए जिन फूटपाथ दुकानदारों और स्थानीय व्यवसायियों को आस थी, उनकी उम्मीद अब इन जर्जर और खंडहर बन चुकी दुकानों के साथ ही दम तोड़ती नजर आ रही है।

फुटपाथ दुकानदारों का हुआ था सर्वे, अबतक नहीं मिली दुकान
कांटाटोली में इन दुकानों के बनने से पहले स्थानीय फुटपाथ दुकानदारों का भी सर्वे किया गया था। योजना थी इन दुकानों में स्थानीय फुटपाथ दुकानदारों को दूकान देकर इसे वेंडर मार्केट के रूप में विकसित कर राजस्व प्राप्ति की। मगर नगर निगम की कुम्भकर्णी नींद और विभागीय उदासीनता के कारण अबतक कांटाटोली के फूटपाथ दुकानदारों को भी एक भी दुकान आवंटित नहीं हुई। नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस संयुक्त रूप से पार्किंग और यातायात प्रबंधन का समाधान नहीं निकालती तो इससे स्थानीय फुटपाथ विक्रेताओं और दुकानदारों को लंबा इंतज़ार करना पड़ सकता है।



