
नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी को प्रचंड बहुमत मिला है। राज्य में पहली बार बीजेपी सरकार बनाने की तैयारी में है। ममता बनर्जी 15 साल तक बंगाल की मुख्यमंत्री रही हैं, लेकिन इस बार जब उनसे सत्ता छिनी तो वो अपनी विधानसभा सीट भी नहीं बचा पाईं।
कैसे मुख्यमंत्री की कुर्सी छोड़ेंगी ममता बनर्जी?
ममता बनर्जी ने विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद आज प्रेस कॉन्फ्रेंस की और कहा, ‘मैं चुनाव नहीं हारी हूं, हमें हराया गया है।’ ममता बनर्जी अगर इस्तीफा नहीं देती हैं तो भी राज्यपाल के पास पूरा हक है कि वो विधानसभा भंग कर दें। 7 मई को 17वीं बंगाल विधानसभा के कार्यकाल के समाप्त होने के बाद 8 मई को सदन भंग हो जाएगा, जिसके चलते सभी विधायकों की सदस्यता स्वतः ही रद हो जाएगी। इसके बाद ममता बनर्जी को इस्तीफा देना अनिवार्य भी नहीं है।
क्या कहता है नियम?
गुरुवार, 7 मई 2026 को 17वीं बंगाल विधानसभा का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। ऐसे में 7 मई के बाद ममता बनर्जी आधिकारिक तौर पर मुख्यमंत्री मानी ही नहीं जाएंगी, क्योंकि विधानसभा के कार्यकाल के समाप्त होने के बाद नए मुख्यमंत्री का निर्वाचन जरूरी होता है। किसी भी राज्य में विधानसभा चुनाव संपन्न होने के बाद चुनाव आयोग नवनिर्वाचित विधायकों की अधिसूचना जारी करता है। इसके बाद नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू होती है।
बंगाल में जैसे ही चुनाव आयोग अधिसूचना जारी करेगा, विधानसभा का नया कार्यकाल शुरू हो जाएगा। नई सरकार बनाने का दावा पेश करने के बाद यदि ममता बनर्जी मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा नहीं देती हैं, तो राज्यपाल उन्हें पद से बर्खास्त कर नई सरकार के गठन की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। दरअसल, एक सरकार पांच साल के लिए आती है और पांच साल का कार्यकाल समाप्त हो जाने के बाद हमारे यहां एक्सटेंशन का कोई नियम नहीं है। फिर यही तरीका रहता है कि राष्ट्रपति शासन लगा दो और चुनाव करा दो, क्योंकि ऐसे तो कोई भी इस्तीफा देगा ही नहीं।
अगर ममता बनर्जी इस्तीफा नहीं देंगी और अगर ऐसे तो हर कोई मुख्यमंत्री सोच ले कि वो इस्तीफा नहीं देगा, लेकिन जब कार्यकाल पूरा हो गया तो राज्यपाल उसके शासन को खत्म कर देगा।



