
दावोस/रांची: झारखंड के प्राचीन मेगालिथ और मोनोलिथ स्थलों से दुनिया को परिचित कराने के उद्देश्य से लंदन दौरे पर गए पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार के नेतृत्व में झारखंड सरकार का एक शिष्टमंडल ने लंदन पुरातत्व संग्रहालय (MOLA) के साथ विस्तृत चर्चा की. इस दौरान झारखंड के प्राचीन मेगालिथ और मोनोलिथ स्थलों के संरक्षण, वैज्ञानिक डेटा, तकनीकी मूल्यांकन और दीर्घकालिक प्रबंधन पर विस्तृत विचार-विमर्श किया गया.
इस बैठक में लंदन पुरातत्व संग्रहालय (MOLA) के एंड्रयू हेंडरसन-श्वार्ट्ज़, डॉ. सारा पेरी (University College London), वार्डेल आर्मस्ट्रांग (एसएलआर कंस्लटिंग ), डॉ. रोड्री गार्डनर, डॉ. लिंडसे लॉयड स्मिथ, जॉन ट्रेही, सिम्पसन और ब्राउन, सू व्हिटल, जॉन सैंडर्स, टॉम ऐडमैन (AECOM), नील मैकनैब (वेसेक्स पुरातत्व), डॉ. स्टू ईव, मैट लीवर्स (Arup), ऑटिली थॉर्नहिल, सीनियर कंसल्टेंट मौजूद थे.
यूके के 4 प्रमुख संस्थानों के साथ विचार-विमर्श:
लंदन में हुई इस बैठक की जानकारी देते हुए पर्यटन मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि आज हमारी टीम यूके के 4 प्रमुख संस्थानों से संवाद कर रही है, ताकि सर्वोत्तम तकनीकी विशेषज्ञता के साथ आगे की ठोस कार्ययोजना बनाई जा सके. इन ऐतिहासिक धरोहरों को यूनेस्को विश्व धरोहर के रूप में वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है. इस कदम से झारखंड की विरासत अब विश्व के सामने होगी. बैठक में अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप संरक्षण पद्धतियों, तकनीकी सहयोग और क्षमता-विकास के संभावित क्षेत्रों पर चर्चा की गई.
इसी क्रम में वार्डेल आर्मस्ट्रांग (एसएलआर कंस्लटिंग )के साथ आयोजित बैठक में झारखंड के मेगालिथिक, मोनोलिथिक और फॉसिल-समृद्ध स्थलों के वैज्ञानिक संरक्षण, पर्यावरण-संवेदी प्रबंधन और दीर्घकालिक योजना से संबंधित विषयों पर विशेषज्ञों से तकनीकी परामर्श किया गया. इन बैठकों का उद्देश्य झारखंड की प्राचीन विरासत के संरक्षण हेतु अंतरराष्ट्रीय तकनीकी विशेषज्ञता के साथ एक संरचित एवं व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करना है, जिससे इन स्थलों का संरक्षण वैज्ञानिक दृष्टिकोण के साथ सुनिश्चित किया जा सके.
झारखंड के ऐतिहासिक स्थलों को विश्व धरोहर में शामिल करने का प्रयास:
सूचना एवं जनसंपर्क विभाग से मिली जानकारी के अनुसार बैठक में मेगालिथिक स्थलों के वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण, संरचनात्मक संरक्षण, परिदृश्य प्रबंधन, समुदाय की भागीदारी और अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम मानकों के अनुरूप दीर्घकालिक संरक्षण रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा हुई. विशेष रूप से इस बात पर जोर दिया गया कि आदिवासी समुदायों से जीवंत रूप से जुड़ी इन ऐतिहासिक संरचनाओं को संरक्षित करते हुए यूनेस्को विश्व धरोहर सूची के लिए एक ठोस और विश्वसनीय प्रस्तुति कैसे तैयार की जाए.
इन संवादों के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय पुरातत्व, विरासत संरक्षण, इंजीनियरिंग और परामर्श के अनुभवों का लाभ उठाने तथा संस्थागत क्षमता निर्माण की दिशा में संभावित सहयोग के क्षेत्रों की पहचान की गई. राज्य सरकार इन विशेषज्ञ सुझावों के आधार पर एक स्पष्ट और व्यावहारिक रोडमैप तैयार करेगी, ताकि झारखंड की मेगालिथिक विरासत का संरक्षण संरचनात्मक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक तीनों स्तरों पर सुदृढ़ हो सके.
इस मौके पर मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झारखंड सरकार राज्य की अमूल्य मेगालिथिक और मोनोलिथिक विरासत के संरक्षण, पुनर्स्थापन एवं सतत प्रबंधन के लिए पूर्ण रूप से प्रतिबद्ध है. उन्होंने कहा कि सरकार इस विरासत को केवल एक पुरातात्विक धरोहर नहीं, बल्कि आदिवासी समुदायों की जीवंत सांस्कृतिक पहचान के रूप में देखती है और इसके संरक्षण के लिए वैज्ञानिक पद्धतियों, सामुदायिक सहभागिता और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से ठोस और दीर्घकालिक प्रयास किए जाएंगे.



