
रांची। झारखंड लोक सेवा आयोग की परीक्षाओं में फैली अनियमितताओं और भ्रष्टाचार के नापाक जाल का बड़ा पर्दाफाश हुआ है। सीआईडी की चार्जशीट में जो खुलासे हुए हैं, वे यह साबित करने के लिए काफी हैं कि किस तरह नियमों की धज्जियां उड़ाकर इस सिस्टम को दीमक की तरह खोखला किया जा रहा था। सीआईडी की रिपोर्ट के मुताबिक, जेपीएससी में काम आवंटन के पूर्व से ही ‘टीडीपीएल’ कंपनी नियमों को ताक पर रखकर, चुपके-चुपके ‘आईटीआई लिमिटेड’ की आड़ में परीक्षाओं के संचालन से जुड़ी हुई थी।
यह पूरा खेल साठगांठ और मिलीभगत का एक ऐसा काला अध्याय है, जिसने पारदर्शिता के हर दावे की धज्जियां उड़ा दी हैं। सीआईडी की जांच में ये सच्चाई सामने आई है कि वित्त विभाग द्वारा वर्ष 2024 में जारी अधिसूचना के अनुसार राज्य में ‘झारखंड प्रोक्योरमेंट ऑफ गुड्स एंड सर्विसेज मैनुअल’ पूरी तरह लागू था। जून 2025 के समय जब टीडीपीएल को काम सौंपा गया, तब भी यही मैनुअल प्रभावी था। नियम यह था कि 10 लाख रुपये से अधिक का काम देने के लिए खुला टेंडर निकालना अनिवार्य था। लेकिन भ्रष्टाचार के सौदागरों ने सारे नियमों को ताक पर रखकर बिना किसी टेंडर के सीधे टीडीपीएल को काम थमा दिया। सीआईडी की रिपोर्ट चीख-चीख कर कह रही है कि निष्पक्ष चयन प्रक्रिया का गला घोंटकर चुनिंदा लोगों को फायदा पहुंचाया गया।
टीडीपीएल को दूध का धुला साबित करने और चयन को महफूज दिखाने के लिए नाटकों और फरेब की इंतहा का एक ऐसा दौर चलाया गया, जो हैरान करने वाला है। टीडीपीएल के चयन को जायज ठहराने के लिए फर्जी तौर पर निविदा खोलने का नाटक रचा गया, जिसमें दो अन्य डमी कंपनियों के नाम पर जाली और झूठे कागजात तैयार किए गए। जब सीआईडी ने टीडीपीएल के टेंडर में शामिल की गई अन्य दो एजेंसियों, ‘एलपीएस सॉल्यूशन’ और ‘नेव असेसमेंट प्राइवेट लिमिटेड’ के निदेशक गौरव भूटानी से पूछताछ की, तो जालसाजी का ऐसा सच सामने आया जिसने जेपीएससी में हुए स्याह घोटाले की पोल खोलकर रख दी। गौरव भूटानी ने साफ कुबूला कि उनकी कंपनियों ने जेपीएससी के किसी भी टेंडर में शामिल होने के लिए कभी कोई प्रपोजल लेटर दिया ही नहीं था। इन कंपनियों को सिर्फ कागजों पर एम्पैनल करने के नापाक मकसद से फर्जी तरीके से घसीटा गया था।
सीआईडी ने जब तथ्यों की गहराई तक पड़ताल की, तो पता चला कि जेपीएससी की 11वीं से 13वीं सिविल सेवा परीक्षा के संचालन के लिए सबसे पहले ‘आईटीआई’ को काम दिया गया था। लेकिन इसके बाद आईटीआई ने अपनी पीठ पीछे खेल करते हुए पूरा काम चुपचाप टीडीपीएल को सौंप दिया। इस पूरे गड़बड़झाले में तत्कालीन जेपीएससी चेयरमैन की संलिप्तता भी सामने आ रही है। इस तरह टीडीपीएल साल 2024 से ही आईटीआई की आड़ में परदे के पीछे से सारा खेल खेल रही थी। जब आईटीआई लिमिटेड इस प्रक्रिया से हटी, तब जाकर 11वीं-13वीं जेपीएससी की मुख्य परीक्षा और इंटरव्यू का फाइनल रिजल्ट तक टीडीपीएल ने ही तैयार किया था।
आपको बता दे कि इससे पहले गुरुवार को अधिवक्ता अनुष्का के मामले में उनके पति कुशाग्र रूद्र राणा ने भी वीडियो जारी करते हुए जेपीएससी में हुए कथित फर्जीवाड़े की बात कुबूली थी। कुशाग्र ने कहा था कि जेपीएससी परीक्षा में नाम निकलवाने के लिए उनकी पत्नी से सात लाख रुपये की डिमांड की गयी थी। जिसने इस पूरे गड़बड़झाले में एक नया एंगल डाल दिया है।



