
रांची: केंद्र सरकार ने सीबीएसई 12वीं की परीक्षा प्रक्रिया में बड़ी लापरवाही सामने आने के बाद बोर्ड के चेयरमैन राहुल सिंह और सचिव हिमांशु गुप्ता को पद से हटा दिया है। केंद्र सरकार ने ये बड़ा फैसला संसदीय समिति के सामने रांची के 12वीं के छात्र सार्थक सिद्धांत के प्रजेंटेशन के ठीक बाद लिया। सार्थक ने सात पेज का अपना प्रजेंटेशन पेश किया था। इसमें ऑन स्क्रीन मार्किंग के लिए वेंडर्स (कंपनियों) का चयन करने की टेंडर प्रक्रिया में खामिकों को दिखाते हुए बोर्ड के सामने कई सवाल भी खड़े किए थे। आइए जानते हैं कौन हैं रांची के सार्थक सिद्धांत ? जिनके एक प्रजेंटेशन से चली गई CBSE चेयरमैन और सचिव की कुर्सी…
कौन हैं सार्थक सिद्धांत?
सार्थक सिद्धांत झारखंड की राजधानी रांची के निवासी हैं। 18 साल के सार्थक सिद्धांत CBSE बोर्ड से कक्षा 12 के छात्र हैं। उन्होंने इसी साल 12वीं की परीक्षा दी थी। जब रिजल्ट आया तो सार्थक सिद्धांत ने नए मार्किंग सिस्टम पर सवाल उठाए और अपनी री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के लिए अपनी स्कैन आंसर शीट मांगी थी। जब उन्हें आंसर शीट मिली तो उन्हें कुछ शक हुआ। इसके बाद उन्होंने जांच पड़ताल शुरू की और नए मार्किंग सिस्टम की खामियों को अपने ब्लॉग और सोशल मीडिया पर शेयर करना शुरू कर दिया।
राहुल गांधी ने की सार्थक सिद्धांत से मुलाकात:
सीबीएसई के चेयरमैन की कुर्सी जाने बाद कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने मंगलवार की शाम छात्र सार्थक सिद्धांत से मुलाकात की। मुलाकात के बाद राहुल गांधी ने सार्थक और उसकी मां-भाई की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा- ‘सार्थक, अपने सिद्धांतों पर अडिग रहो।’
सार्थक ने ब्लॉग में क्या कहा?
सार्थक ने पड़ताल में पाया कि हैदराबाद की कंपनी कॉएम्पट एडुटेक को सीबीएसई ने टेंडर दिया था। टेंडर देने के लिए बोर्ड ने तीन बार नियमों में बदलाव किया। कॉएम्पट एडुटेक ‘ब्लैकलिस्टेड’ कंपनी है, उसे जोड़ने के लिए प्रावधान को भी बदला गया। जिस कंपनी पर पहले भी गड़बड़ियों के आरोप लगे थे, ऐसी कंपनी को फिर से टेंडर क्यों दिया गया?
- दो बार टेंडर रद्द होने के बाद तीसरे प्रयास में पात्रता शर्तों में बदलाव किया गया।
- औसत वार्षिक टर्नओवर की सीमा ऐसी रखी गयी कि कोएम्प्ट पात्र हो सके।
- ब्लैकलिस्टिंग संबंधी शर्त में ‘अर्लियर’ शब्द जोड़ने पर सवाल उठाए।
- आरोप है कि ‘अर्लियर’ शब्द जोड़ने से पहले से ब्लैकलिस्टेड कंपनी को लाभ मिला।
- सीएमएमआई स्तर की अनिवार्यता 5 से घटाकर 3 किए जाने पर आपत्ति उठाई।
- डेटा सेंटर और डिजास्टर रिकवरी सेंटर की मूल शर्तें नरम की गईं।
- थर्ड पार्टी क्लाउड सेवा एडब्ल्यूएस, एज्योर और गूगल क्लाउड की अनुमति दी गई।
जेवीएम श्यामली के छात्र सार्थक सिद्धांत टेक रिसर्चर:
सार्थक सिद्धांत जेवीएम श्यामली का छात्र और एक टेक रिसर्चर हैं। वर्तमान में सार्थक दिल्ली में रह रहा है। सार्थक के पिता दिलीप कुमार झा की कुछ साल पहले मौत हो चुकी है। सार्थक ने 12वीं कक्षा का परिणाम आने के बाद सीबीएसई के 576 से अधिक दस्तावेजों, टेंडर शर्तों और वित्तीय रिकॉर्ड का अध्ययन कर ओएसएम टेंडर प्रक्रिया में कथित विसंगतियों को उजागर किया।



