उत्पाद सिपाही पेपर लीक मामले में गिरफ्तार 159 अभ्यर्थियों को कोर्ट से मिली जमानत, शुरू से इस मामले में कमजोर था पुलिस का पक्ष, साबित नहीं कर पायी वैध गिरफ्तारी
पुलिस 650 पन्नो की केस डायरी में भी यह साबित नहीं कर पायी कि अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी के पीछे का कारण 'पेपर लीक' है।

रांची. उत्पाद सिपाही पेपर लीक मामले में तमाड़ थाना क्षेत्र के रडगांव स्थित अर्धनिर्मित नर्सिंग कॉलेज से गिरफ्तार 159 अभ्यर्थियों को आज जमानत दे दी गयी। अपर न्याययुक्त योगेश कुमार की अदालत ने आरोपितों को 20-20 हजार रुपए के दो मुचलकों पर जमानत का आदेश दिया है। इस मामले में शुरू से ही पुलिस का पक्ष बेहद कमजोर और तर्कहीन रहा। पुलिस 650 पन्नो की केस डायरी में भी यह साबित नहीं कर पायी कि अभ्यर्थियों की गिरफ्तारी के पीछे का कारण ‘पेपर लीक’ है। पुलिस की केस डायरी में पेपर लीक का कोई सबूत नहीं था, पुलिस द्वारा दर्ज धाराओं में ही विरोधाभास झलक रहा था। जिसपर अदालत ने जेएसएससी से विस्तृत रिपोर्ट मांगी थी। जेएसएससी बार बार यह दोहराती रही, कि पेपर लीक का कोई सबूत नहीं है। जिसपर बचाव पक्ष की दलीले भारी पड़ती दिखी, जिसमे कहा गया कि जब पेपर लीक हुआ ही नहीं, तो किस आधार पर 168 लोगो की गिरफ्तारी हुई है।

गौरतलब है कि 11 अप्रैल 2026 को पेपर लीक मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए पुलिस ने 166 लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें अधिकांश परीक्षार्थी शामिल थे। पुलिस को सूचना मिली थी कि तमाड़ थाना क्षेत्र के रड़गांव स्थित एक अर्धनिर्मित भवन में बड़ी संख्या में लोग जमा हैं। सूचना के आधार पर विशेष छापेमारी दल ने 11 अप्रैल की देर रात वहां कार्रवाई की। पुलिस को देखते ही मौके पर मौजूद लोग भागने लगे, लेकिन घेराबंदी कर 166 लोगों को पकड़ लिया गया। गिरफ्तार आरोपितों में अंतरराज्यीय पेपर लीक गिरोह के पांच कथित सरगना अतुल वत्स, विकास कुमार, शेर सिंह, आशीष कुमार और योगेश प्रसाद भी शामिल हैं। इसके अलावा सात महिला आरोपितों को भी गिरफ्तार किया गया था। अदालत में यह बताया गया कि अभ्यर्थियों को जो पेपर मिले थे, उसमें परीक्षा में आए प्रश्न पत्रों में से दो-तीन प्रश्नों के अलावा कोई भी प्रश्न पत्र मैच नहीं कर रहा था इससे यह सिद्ध होता है कि मामले में 159 अभ्यर्थी दोषी नहीं है। गौरतलब है कि पेपर लीक मामले में 166 आरोपितों को रांची पुलिस ने गिरफ्तार किया था।



