
हजारीबाग. हजारीबाग जिले के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कुसुम्भा में दिल दहला देने वाली वारदात का पुलिस ने खुलासा कर दिया है। अंधविश्वास और तांत्रिक क्रिया के नाम पर समाज को शर्मसार करने वाली इस घटना ने ना केवल अंधविश्वास कि परिकाष्ठा का परिदय दिया है बल्कि पूरे विश्व में ममता को भी कलंकित कर दिया है। 12 वर्ष की नाबालिग बच्ची की निर्मम हत्या के सनसनीखेज मामले में पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस जघन्य अपराध में शामिल तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
दरअसल, 25 मार्च 2026 की सुबह लगभग 8:30 बजे विष्णुगढ़ थाना को सूचना मिली कि कुसुम्भा गांव के मिडिल स्कूल के पीछे मैदान में एक बच्ची का शव पड़ा हुआ है। जांच में पता चला कि बच्ची 24 मार्च की रात ‘मंगला जुलूस’ में शामिल हुई थी, जिसके बाद वह लापता हो गई थी।मृतका की मां रेशमी देवी (उम्र लगभग 35 वर्ष) के आवेदन के आधार पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया। प्रारंभिक जांच में हत्या के पीछे अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र की आशंका सामने आई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर एसआईटी (विशेष जांच टीम) का गठन किया गया।


तांत्रिक क्रिया और ‘बली’ का भयावह सच
SIT की गहन पूछताछ और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जब पुलिस ने गाँव की महिला तांत्रिक शांति देवी उर्फ भगतीनी (55 वर्ष) को हिरासत में लिया, तो उसने इस खौफनाक साजिश की पूरी परतें खोल दीं। रेशमी देवी अपने बेटे की शारीरिक और मानसिक बीमारी को लेकर पिछले एक साल से भगतनी के पास जा रही थी। भगतनी ने उसे बहकाया कि बेटे को ठीक करने के लिए एक ‘कुंवारी लड़की’ की बलि देनी होगी। 24 मार्च (अष्टमी) की रात करीब 9:30 बजे, भगतीनी के कहे अनुसार रेशमी देवी और उसके एक सहयोगी भीम राम बच्ची को लेकर भगतीनी के घर पहुंचे। वहाँ बच्ची को जमीन पर लेटाकर बलि की प्रक्रिया शुरू की गई। भीम राम ने बच्ची का गला घोटा, जबकि उसकी सगी माँ (रेशमी देवी) ने उसके पैर पकड़ रखे थे ताकि वह छटपटा न सके। हत्या के बाद भगतनी ने बच्ची के शरीर के साथ तांत्रिक क्रियाएं कीं। भीम राम ने बलि के खून के लिए पत्थर से बच्ची के सिर और चेहरे पर वार किया। अंत में, उस मासूम के खून से भगतनी ने अपने ‘मनसा मंदिर’ में छिड़काव कर पूजा संपन्न की।
पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस जघन्य हत्याकांड में शामिल तीनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों में भीम राम (45 वर्ष), हत्या का मुख्य सहयोगी। रेशमी देवी (35 वर्ष), मृतका की माँ, शांति देवी उर्फ भगतीनी (55 वर्ष), हत्या की साजिशकर्ता और तांत्रिक शामिल है। तीनों आरोपी ग्राम कुसुम्भा, थाना विष्णुगढ़, जिला हजारीबाग के निवासी हैं। इस मामले का खुलासा करने वाली टीम का नेतृत्व श्री नागरगोजे शुभम भाऊसाहेब (IPS) ने किया। टीम में अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी बैद्यनाथ प्रसाद और विष्णगढ़ थाना प्रभारी समेत अन्य अधिकारी शामिल थे।
समाज के लिए चेतावनी
यह घटना समाज में व्याप्त अंधविश्वास और तंत्र-मंत्र के नाम पर होने वाले अपराधों की भयावह सच्चाई को उजागर करती है। एक मां द्वारा ही अपनी बेटी को इस तरह के कृत्य के लिए सौंप देना पूरे समाज को झकझोर देने वाला है। हजारीबाग की यह घटना सिर्फ एक आपराधिक मामला नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना के लिए गंभीर चेतावनी है। जरूरत है कि अंधविश्वास के खिलाफ व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जाएं ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।



