रांची में खरवार भोगता समाज का महासम्मेलन, शहीद नीलाम्बर-पीताम्बर की शहादत दिवस पर सरकारी अवकाश की घोषणा और शहीदों की वीरता को पाठ्य पुस्तकों में शामिल कराने का प्रस्ताव पारित
वक्ताओं ने मांग की कि देश के संसद भवन, लोकभावन और विधानसभा सहित अन्य सरकारी कार्यालयों में उनके वृत्त चित्र को लगाया जाए।

Ranchi. रांची के मोरहाबादी मैदान में आज खरवार भोगता समाज का महासम्मेलन आयोजित किया गया। इस महासम्मेलन का उद्देश्य शहीद नीलाम्बर-पीताम्बर को श्रधांजलिं देना और सरकार को अपनी विभिन्न मांगो से अवगत कराना था। महासम्मेलन में बड़ी संख्या में राज्य भर से खरवार भोगता आदिवासी समाज के लोग पारम्परिक वेशभूषा और सांस्कृतिक गाजे बाजे के साथ शामिल हुए।

वक्ताओं ने अपने भाषणों में राज्य के शहीदों को उचित सम्मान ना मिलने और आदिवासी समाज के उत्थान के प्रति केंद्र व् राज्य सरकारों की उपेक्षा का हवाला देते हुए कहा की आजादी के कई दशक बीत जाने के बाद भी आदिवासी समाज के शहीदों को लेकर ना तो केंद्र सरकार ना ही राज्य सरकार गंभीर दिख रही है। शहीद नीलाम्बर-पीताम्बर, उनके पिता चमु सिंह भोगता और सभी पुत्रो की शहादत के बारे में आने वाली पीढ़ी को जागरूक और शिक्षित करना आज समय की मांग है। ऐसे भारत पुत्रो के बलिदान को स्वतंत्र देश भूल गया है। केंद्र और राज्य सरकारों ने इन महापुरुषों की वीरगाथा को आज गौण कर दिया है। सरकारी कार्यालयों में इन महापुरुषों की तस्वीरें नहीं लगाई जाती है, साथ ही इनकी प्रतिमाएं भी महत्वपूर्ण स्थानों पर नहीं है।

वक्ताओं ने मांग की कि देश के संसद भवन, लोकभावन और विधानसभा सहित अन्य सरकारी कार्यालयों में उनके वृत्त चित्र को लगाया जाए। भारत की भावी पीढ़ी इनकी वीरता को जाने, इसके लिए पाठ्य पुस्तकों में इनकी वीरता और जीवनी से सम्बंधित पाठ्यक्रम शामिल किये जाए। जिस जगह पर शहीद नीलाम्बर-पीताम्बर को फांसी दी गयी, और कुएं में दाल दिया गया, उसपर सरकार का कोई ध्यान नहीं है।

सम्मलेन के माध्यम से शहीद नीलाम्बर-पीताम्बर की शहादत दिवस पर राजकीय अवकाश घोषित करने, महापुरुषों से सम्बंधित पाठ्यक्रम को पाठ्य पुस्तकों में शामिल कराने और महत्वपूर्ण सरकारी कार्यालयों में इन महापुरुषों के वृत्त चित्र को स्थान देने का प्रत्सव पारित किया गया।



