
रांची. झारखंड में 23 फरवरी को होने वाले नगर निकाय चुनावों के लिए प्रचार का शोर आज थम गया। मगर सियासी शोर थमने का नाम नहीं ले रहे है। आज भाजपा सांसद संजय सेठ ने बैलेट पेपर से हो रहे नगर निकाय चुनावों की मंशा पर सवाल उठाते हुए इसे मतदान प्रक्रिया में बाधा डालने वाला कदम बताया। संजय सेठ ने कहा कि राज्य सरकार की मंशा यह चुनाव कराने की बिल्कुल नहीं थी। माननीय उच्च न्यायालय लंबी लड़ाई लड़ी गयी, जिसके परिणाम स्वरुप निकाय चुनाव हो रहे है। अब चूंकि राज्य सरकार की मंशा चुनाव कराने की नहीं थी, इसलिए वो कदम-कदम पर इस चुनाव को बाधित करने का काम कर रही है।

सांसद संजय सेठ ने कहा कि एक ही परिवार से जुड़े सदस्यों का बूथ अलग-अलग वार्डों में कर दिया गया है। जबकि आज से पहले परिवार के सभी सदस्य एक ही बूथ पर अपना वोट डालते थे। खुद मेरे परिवार में मेरा मतदान केंद्र कोई और है, मेरी पत्नी का मतदान केंद्र कोई और है। ऐसा राज्य का लाखों परिवारों के साथ जानबूझकर किया गया है। इसके पीछे राज्य सरकार और प्रशासन की मंशा यही है कि मतदान का प्रतिशत कम से कम हो। एक तरफ हम टेक्नोलॉजी में आगे बढ़ रहे हैं तो दूसरी तरफ राज्य की सरकार बैलेट पेपर पर मतदान करवा रही है ताकि मतदान बाधित हो सके।
प्रत्याशियों ने जनसंपर्क में झोंकी ताकत

भोंपू का शोर थमने के बाद अब निकाय चुनाव के प्रत्याशी जनसंपर्क अभियान में जुट गए है। प्रत्याशी घर घर जाकर मतदाताओं को अपना विजन बता रहे है। रांची के दो प्रमुख प्रत्याशियों (रौशनी खलखो और रमा खलखो) ने विभिन्न वार्डो में पदयात्रा कर जनता से समर्थन मांगा। रांची में 23 फरवरी को वोटिंग होनी है।



