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रांची समेत 48 नगर निकायों के चुनाव की तारीखों का ऐलान, 23 फरवरी को होगा मतदान, 27 फरवरी को काउंटिंग, बैलेट पेपर से होगी वोटिंग, जानिये नगर निकाय चुनाव से जुडी तमाम बड़ी बातें

रांची: झारखंड में लंबे समय से लंबित नगर निकाय चुनाव का ऐलान हो गया है। राज्य निर्वाचन आयोग ने आज 48 नगर निकायों के लिए चुनाव की घोषणा कर दी है। सभी नगर निकायों में 23 फरवरी (सोमवार) को वोटिंग होगी। 48 निकायों में मतदान एक ही दिन होगा। मतदान बैलेट पेपर से कराया जायेगा। वहीं, 27 फरवरी को वोटों की गिनती की जाएगी।

मतदान सुबह सात बजे से शाम 5 बजे तक होगा। 29 जनवरी से 4 फरवरी तक नामाकंन की तिथि रखी गई है। 5 फरवरी को स्क्रूटनी की जाएगी। नामांकन वापस लेने की अंतिम तारिख 6 फरवरी होगी। इसके बाद कैंडिडेट्स को 7 फरवरी को चुनाव चिन्ह आवंटित किए जाएंगे।

नगर निकाय चुनाव का पूरा चुनावी कार्यक्रम

नोटा का विकल्प नहीं:

इस निर्वाचन के लिए कुल मतदान केंद्रों की संख्या 4304 है, जो कुल 2129 भवनों में स्थित है। इस चुनाव में नोटा का विकल्प नहीं रहेगा। कुल मतदाताओं की संख्या 43 लाख 33 हजार 574 हैं। इनमें पुरुष वोटर 22 लाख 7 हजार 203 और महिला मतदाताओं की संख्या 21 लाख 26 हजार 227 है। वहीं, ट्रांसजेंडर वोटर 144 है।

ट्रिपल टेस्ट के बाद पहली बार हो रहा निकाय चुनाव:

यह नगर निकाय चुनाव कई मायनों में खास है। ट्रिपल टेस्ट पूरा होने के बाद राज्य में पहली बार नगर निकाय चुनाव कराए जा रहे हैं। इन 48 निकायों में 9 नगर निगम, 20 नगर परिषद और 19 नगर पंचायत शामिल हैं। यहां वर्ष 2020 से ही चुनाव लंबित थे। उस समय कोरोना महामारी के कारण सरकार ने निकाय चुनाव स्थगित कर दिए थे।

बाद में ओबीसी आरक्षण और ट्रिपल टेस्ट को लेकर निर्णय में देरी होती रही। अंततः हाईकोर्ट के हस्तक्षेप और समय सीमा तय करने के बाद चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ी। इसी बीच राज्यपाल ने विधानसभा के बजट सत्र के कार्यक्रम को भी मंजूरी दे दी है, जिससे सरकार और चुनाव आयोग दोनों के लिए आगे की कार्यवाही का रास्ता पूरी तरह साफ हो गया है।

चुनावों के नतीजे आने वाले बड़े राजनीतिक मुकाबलों की दिशा तय करेंगे:

झारखंड में कुल 48 शहरी स्थानीय निकायों में 9 नगर निगम, 20 नगर परिषद और 19 नगर पंचायत शामिल हैं। इन निकायों के माध्यम से शहरों के विकास, आधारभूत संरचना, स्वच्छता, पेयजल, सड़क, स्ट्रीट लाइट और अन्य नागरिक सुविधाओं से जुड़े जनप्रतिनिधियों का चुनाव किया जाएगा। शहरी विकास की दिशा तय करने में इन निकायों की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। माना जा रहा है कि इन चुनावों के नतीजे आने वाले बड़े राजनीतिक मुकाबलों की दिशा तय करेंगे। यही वजह है कि सभी प्रमुख राजनीतिक दल अभी से अपनी रणनीति को धार देने में जुट गए हैं।

अधिकतम 25 लाख रुपए ही मेयर उम्मीदवार कर सकेंगे खर्च:

निर्वाचन आयोग ने नगर निकाय चुनाव में खर्च की सीमा भी तय कर रखी है। आयोग की ओर से बताया गया है कि वैसे नगर निगम क्षेत्र, जहां की जनगणना 2011 के अनुसार जनसंख्या 10 लाख या उससे अधिक है, वहां महापौर/अध्यक्ष के उम्मीदवार अधिकतम 25 लाख रुपए और वार्ड पार्षद पांच लाख रुपए तक खर्च कर सकेंगे। वैसे नगर निगम क्षेत्र जहां की आबादी 10 लाख से कम है, वहां महापौर/अध्यक्ष के लिए 15 लाख रुपए और वार्ड पार्षद के लिए तीन लाख रुपए निर्धारित किया गया है।

बात करें नगर परिषद चुनाव की तो वैसे नगर परिषद जहां की जनसंख्या 1 लाख एवं उससे अधिक है, वहां महापौर/अध्यक्ष के उम्मीदवार अधिकतम 10 लाख रुपए और वार्ड परिषद दो लाख रुपए खर्च कर सकेंगे। 1 लाख से कम आबादी वाले नगर परिषद में महापौर/अध्यक्ष अधिकतम 6 लाख रुपए और वार्ड पार्षद डेढ़ लाख रुपए खर्च कर सकेंगे। 12000 या इससे अधिक तथा 40000 से कम आबादी वाले नगर पंचायत में महापौर/अध्यक्ष 5 लाख रुपए और वार्ड पार्षद एक लाख रुपए तक खर्च कर सकेंगे।

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