सरना आदिवासियों को हिन्दू बताने वाले आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत के बयान पर बिफरे बंधू तिर्की बोले – भाजपा-आरएसएस आदिवासियों को कभी वनवासी, कभी वनमानुष कहकर अपमानित करती है
आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने रांची में संवाद कार्यक्रम में आदिवासियों के सरना धर्म को धार्मिक पहचान नहीं, बल्कि एक पूजा पद्दति बताया था।

रांची. सरना को पूजा पद्दति बताने और सरना धर्मावलम्बियों को हिन्दू कहने पर बंधू तिर्की ने कड़ी आपत्ति जताई है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने रांची में संवाद कार्यक्रम में आदिवासियों के सरना धर्म को धार्मिक पहचान नहीं, बल्कि एक पूजा पद्दति बताया था। उन्होंने कहा था कि सरना धर्मावलम्बी भी हिन्दू ही है। इसी बयान पर अब बंधू तिर्की ने मोहन भागवत और भाजपा पर निशाना साधा है। बंधू तिर्की ने कहा कि बरसो बरसो से सरना धर्मावलंबी अपनी धार्मिक पहचान की लड़ाई लड़ रहे है। इसीलिए सरना धर्मकोड की मांग की जा रही है। संविधान सभी को धार्मिक आजादी देता है। सरना आदिवासी जो प्रकृति के पूजक है, उन्हें आजतक धार्मिक पहचान नहीं मिली। हिन्दू, मुस्लिम, सिख, जैन, ईसाई का अलग धर्मकोड है तो 15 करोड़ से अधिक सरना धर्मावलम्बियों के लिए सरना धर्मकोड क्यों नहीं ? उन्होंने कहा कि मोहन भागवत का बयान राजनीति से प्रेरित है। मोहन भागवत संविधान को बदलने और आरक्षण को समाप्त करने की बात करते रहे है। जब छत्तीसगढ़ का हसदेव जंगल उजाड़ा जा रहा था, सिंगरौली के आदिवासियों को उजाड़ा जा रहा था, मणिपुर में जब आदिवासियों को अपमानित किया जा रहा था, तब मोहन भागवत या बीजेपी के किसी नेता ने कुछ नहीं कहा। सरना धर्मकोड पर मोहन भागवत के बयान की मैं निंदा करता हूँ। उन्होंने पूछा, रांची के सरवती शिशु विद्या मंदिर का संचालन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ द्वारा किया जाता है। मोहन भागवत बताये कि कितने सरना धर्मावलम्बी आदिवासियों के बच्चो को सरस्वती शिशु विद्या मंदिर में नामांकन मिला है। भाजपा और आरएसएस हमेशा से आदिवासियों को कभी वनवासी तो कभी वनमानुष कहकर अपमानित करती रही है। अब वह हमारे धार्मिक पहचान की मांग का भी अपमान कर रही है।



