
रांची. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने आदिवासियों के अलग ‘सरना धर्म कोड’ पर बड़ा बयान दिया है. राजधानी रांची के कार्निवल बैंक्वेट हॉल में शनिवार को आयोजित जनजातीय संवाद कार्यक्रम में मोहन भागवत ने सरना को महज पूजा पद्धति बताया. उन्होंने साफ कहा कि सरना पूजा पद्धति है. आदिवासी और हिंदू समाज अलग नहीं है. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि सरना को अलग धर्म के रूप में देखना समाज को तोड़ने का प्रयास है. उनका बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य का आदिवासी समाज लगातार अपनी अलग धार्मिक पहचान और जनगणना कॉलम में अलग सरना धर्म कोड की मांग को लेकर आंदोलन कर रहा है. सीएम हेमंत सोरेन ने 2020 में आदिवासी समाज के लिए अलग सरना आदिवासी धर्म कोड का प्रस्ताव झारखंड विधानसभा से पास कर केंद्र को भेज दिया है, जो पिछले कई सालों से केंद्र सरकार के पास लंबित है.



