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61 दिनों से लापता कन्हैया कुमार कोडरमा से सकुशल बरामद, 22 नवंबर से रांची से था गुमशुदा

रांची: जिला की चंदवारा पुलिस ने 61 दिनों से लापता एक 12 वर्षीय बच्चे को सकुशल बरामद कर लिया है. जानकारी के अनुसार, 12 साल का कन्हैया कुमार 22 नवंबर की शाम रांची के ओरमांझी से लापता हो गया था. थाना में परिजनों द्वारा केस करने के बाद से पुलिस लगातार उसकी तलाश में थी.

लापता कन्हैया कुमार की बरामदगी को लेकर रांची पुलिस द्वारा एक एसआईटी का गठन किया गया. जहां एसआईटी के द्वारा बच्चे की तस्वीर राज्य के सभी थानों को भेज दी गई थी. साथ ही देश भर के 7 राज्यों में उसकी बरामदगी के लिए छापेमारी भी की जा रही थी. इसी दौरान कोडरमा के चंदवारा थाना पुलिस को थाना क्षेत्र के उरवां से एक गुमशुदा बच्चे की जानकारी मिली.

कैसे कोडरमा पहुंचा कन्हैया?

कन्हैया कुमार को कोडरमा पुलिस ने चंदवारा थाना क्षेत्र के जामुखाड़ी से बरामद कर रांची के ओरमांझी पुलिस के सुपुर्द कर दिया है. कन्हैया ने कोडरमा पुलिस को बताया कि वह घर से भटकते हुए हाजीपुर (बिहार) स्थित ननिहाल चला गया था. वहां से वापस लौटने के दौरान बस चालक ने उसे चंदवारा थाना क्षेत्र के जामुखड़ी के पास उतार दिया. इसके बाद वह इधर-उधर भटकने लगा. बच्चे ने यह भी बताया कि घर में उसके साथ अच्छा व्यवहार नहीं होता था इसलिए वह अपने बारे में किसी को भी बताना नहीं चाहता था.

इसी दौरान एक मछली विक्रेता राजा साहनी की नजर उस बच्चे पर पड़ी. अनजान और डरा-सहमा देख राजा साहनी ने कई दिनों तक उसे अपने घर में आश्रय दिया. साथ ही बच्चे की पहचान के लिए स्थानीय पुलिस और व्हाट्सएप ग्रुप में भी सूचना साझा की. कन्हैया कोडरमा के चंदवारा थाना क्षेत्र स्थित जामुखड़ी मछली दुकान के पास पहुंचा था, जहां पूछताछ के दौरान वह कुछ भी स्पष्ट नहीं बता पा रहा था.

इधर, रांची में लापता बच्चों और बच्चा चोर गिरोह की तलाश में गठित एसआईटी से मिले इनपुट के आधार पर कोडरमा पुलिस ने कन्हैया कुमार की पहचान की और उसे बरामद कर ओरमांझी पुलिस के सुपुर्द कर दिया. इस मामले की जानकारी देते हुए डीएसपी रतिभान सिंह ने बताया कि बरामद बच्चे को ओरमांझी पुलिस को सौंप दिया गया है. आगे की जांच अब ओरमांझी पुलिस द्वारा की जाएगी. उन्होंने बताया कि कन्हैया के अपहरण को लेकर 11 दिसंबर को ओरमांझी थाने में मामला दर्ज कराया गया था.

जिसके बाद चंदवारा थाना प्रभारी शशिभूषण कुमार उरवां गांव पहुंचे और बच्चे को सकुशल बरामद किया और बच्चे की एक तस्वीर कोडरमा के पुलिस कप्तान अनुदीप सिंह को भेजा. जिसके बाद एसपी अनुदीप सिंह ने बरामद बच्चे की तस्वीर को रांची के एसएसपी राकेश रंजन को भेजी और इससे संबंधित जानकारी ली. जिसमें यह बात सामने आई कि बच्चा रांची के ओरमंसाझी से लापता कन्हैया कुमार है. इस बच्चे की सकुशल बरामदगी के बाद रांची पुलिस कोडरमा पहुंची. बच्चे की बरामदगी को लेकर चंदवारा थाना प्रभारी शशिभूषण कुमार ने बताया कि कन्हैया कुमार को फिलहाल चंदवारा थाना में ही रखा गया है. जिसे बाद में रांची पुलिस के पदाधिकारियों के आने पर बच्चे को उनके सुपूर्द किया गया.

ओरमांझी थाना में परिजनों को सौंपा गया कन्हैया

झारखंड पुलिस की त्वरित कार्रवाई और सतत प्रयासों से ओरमांझी थाना क्षेत्र से लापता 12 वर्षीय बालक कन्हैया कुमार को सकुशल बरामद कर लिया गया है. पुलिस की सक्रियता, सोशल मीडिया और प्रिंट मीडिया में व्यापक प्रचार-प्रसार के कारण यह सफलता मिली, जिससे बच्चा अंततः अपने परिजनों तक सुरक्षित पहुंच सका. रांची के ग्रामीण एसपी प्रवीन पुष्कर ने बताया कि कैसे कन्हैया को बरामद किया गया.

ओरमांझी निवासी कन्हैया कुमार (उम्र 12 वर्ष), पिता अर्जुन साव, के लापता होने की सूचना पर ओरमांझी थाना में कांड संख्या 223/25 दर्ज किया गया था. मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, रांची के निर्देश पर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक के नेतृत्व में एक विशेष टीम का गठन किया गया. इस टीम में जिले के दो दर्जन से अधिक पुलिस पदाधिकारियों को शामिल किया गया, जिन्होंने लगातार छानबीन और खोज अभियान चलाया.

पुलिस ने जांच के दौरान सभी संभावित पहलुओं पर काम किया. बच्चे की तलाश के लिए सोशल मीडिया, प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से बड़े पैमाने पर सूचना प्रसारित की गई. साथ ही सार्वजनिक स्थानों और वाहनों पर पोस्टर चिपकाकर आम लोगों से सहयोग की अपील की गई. इसी व्यापक प्रचार का सकारात्मक परिणाम सामने आया, जब कोडरमा जिला के चंदवारा क्षेत्र से एक जागरूक नागरिक ने पुलिस को कन्हैया के बारे में सूचना दी. सूचना के सत्यापन के बाद चंदवारा थाना (कोडरमा) की मदद से 19 जनवरी 2026 को रांची पुलिस ने कन्हैया को सकुशल बरामद कर लिया.

कन्हैया कुमार की बरामदगी के बाद पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए कन्हैया को सुरक्षित रूप से उसके परिजनों तक पहुंचाने की व्यवस्था की. इस पूरे मामले में झारखंड पुलिस की तत्परता, मानवीय दृष्टिकोण और समन्वित कार्रवाई की सराहना की जा रही है, जिसने एक परिवार को फिर से अपने बच्चे से मिला दिया.

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