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बांग्लादेशी घुसपैठ और डेमोग्राफी चेंज के नाम पर सिर्फ राजनीति, कार्रवाई ऊंट के मुंह में जीरा के समान, आंकड़ों से जानिये देश में बांग्लादेशी घुसपैठ की पूरी हकीकत

नयी दिल्ली: बीजेपी भारत में बांग्लादेशी घुसपैठ का मुद्दा जोर-शोर से उठाती रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी 79वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले के प्राचीर से बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश से बाहर निकालने का ऐलान किया. मगर दावों और सियासत से उलट, बांग्लादेशी घुसपैठियों को चिन्हित करने और देश से निकालने की असल जमीनी हकीकत क्या है, इसका जवाब लोकसभा और राज्यसभा में केंद्र सरकार द्वारा दिए गए प्रश्नोत्तर से पता चलता है. बीजेपी लगातार कांग्रेस और विपक्षी पार्टियों पर बांग्लादेशी घुसपैठ को बढ़ावा देने का आरोप लगाती रहती है, मगर केंद्र सरकार के खुद के आंकड़ें इस बात की तस्दीक करते है कि बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश से बाहर निकालने में केंद्र की मोदी सरकार सुस्त और कांग्रेस की तुलना में कहीं पीछे है.

गृह मंत्रालय द्वारा लोकसभा और राज्यसभा में प्रस्तुत सरकारी जवाब में केंद्र सरकार ने बताया कि मनमोहन सिंह के कार्यकाल के महज 3 सालों में ही (वर्ष 2011 से 2013 तक) देश में कुल 18,532 बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश से बाहर निकाला गया, जबकि मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान (2014 से 2019 के बीच) मात्र 2,566 बांग्लादेशी घुसपैठियों को ही देश से बाहर निकाला गया. यह स्वर्गीय मनमोहन सिंह के कार्यकाल के केवल 3 वर्षो में ही बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश से बाहर निकालने के दर का एक तिहाई से भी कम है.

ऐसा नहीं है कि मोदी सरकार के कार्यकाल के दौरान देश में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों की संख्या में कोई गिरावट आयी. बल्कि केवल 2017, 2018 और 2019 की ही बात करें, तो 2017, 2018 और 2019 में क्रमशः 25,942, 49,645 और 35,055 ऐसे अवैध बांग्लादेशी घुसपैठिये चिन्हित किये गए थे, जो वीजा अवधि के पूरे होने के बावजूद लंबे समय से भारत में रह रहे थे. यानी इन तीन वर्षो का ही आंकड़ा गिन लय जाये, तो यह 1,10,642 हो जाता है. जबकि इसी दौरान अवैध रूप से देश में रह रहे बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश से बाहर निकालने का आंकड़ा महज 2,566 था.

ये तो वे बांग्लादेशी थे, जो वीजा अवधि पूर्ण होने के बाद भी भारत में रह रहे थे. जिनकी पूरी जानकारी भारत सरकार को थी. मगर फिर भी देश से बाहर निकालने का आंकड़ा महज 2,566 था. तो ऐसे में इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि उन अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों को चिन्हित करने और देश से बाहर निकालने के मामले में भारत सरकार कितनी संजीदा है, जो बगैर वीजा के देश में अवैध रूप से दाखिल हुए होंगे. मोदी सरकार के दौरान बांग्लादेशी घुसपैठियों को देश से बाहर निकालने के नाम पर हुई कार्रवाई ऊंट के मुंह में जीरा के बराबर थी.

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