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असम में जेएमएम की दस्तक: मज़बत और गोसाईगांव में दिखाया दमखम, दूसरे स्थान पर रहीं प्रीती रेखा बारला, मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा – असम में उम्मीदवार उतारना केवल चुनावी प्रयास नहीं, बल्कि अस्तित्व, पहचान और अधिकारों की लड़ाई है

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि यह केवल एक चुनावी प्रयास नहीं, बल्कि अस्तित्व, पहचान और अधिकारों की लड़ाई है, और आपके साथ, आपके विश्वास के साथ, यह संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।

गुवाहाटी/रांची. असम विधानसभा चुनाव के नतीजों में झारखंड की सत्ताधारी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा ने अपनी उपस्थिति का अहसास कराया है। पार्टी ने चाय बागान बहुल और आदिवासी क्षेत्रों में उल्लेखनीय मत प्राप्त किए हैं। हालाँकि, पार्टी जीत का खाता खोलने में असफल रही, लेकिन कई सीटों पर उसके उम्मीदवारों ने सम्मानजनक वोट हासिल कर अन्य दलों के समीकरणों को प्रभावित किया है। जेएमएम का सबसे शानदार प्रदर्शन मज़बत और गोसाईगांव विधानसभा सीटों पर रहा। मज़बत से पार्टी प्रत्याशी प्रीती रेखा बारला ने 29,172 वोट हासिल कर दूसरा स्थान प्राप्त किया। वहीं गोसाईगांव में पडरिक्सों हंसदक को 21,417 वोट मिले, जहाँ वे दूसरे स्थान पर रहते हुए बोडोलैंड पीपल फ्रंट (BPF) को कड़ी टक्कर दी।आंकड़ों का विश्लेषण बताता है कि जेएमएम ने असम की चुनावी राजनीति में ‘तीसरी शक्ति’ के रूप में उभरने की कोशिश की है। पार्टी डिगबोई, भेरगाओं, और खूमताई जैसी महत्वपूर्ण सीटों सहित कुल 13 विधानसभा क्षेत्रों में तीसरे स्थान पर रही।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जताया जनता का आभार

असम विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि असम की महान जनता को जोहार एवं हृदय से आभार। बहुत ही सीमित समय और संसाधन में जो कुछ भी किया जा सका, वह आप सभी के सहयोग, विश्वास और सक्रिय भागीदारी के बिना संभव नहीं था। इस संघर्ष में जिस तरह से आपने हमारा साथ दिया, वह न केवल सराहनीय है, बल्कि हमारे लिए अत्यंत हौसला बढ़ाने वाला भी है। आपका यह समर्थन हमारे लिए शक्ति, प्रेरणा और नई ऊर्जा का स्रोत है।

सीएम ने कहा कि असम में चुनाव लड़ने का फैसला झारखंड मुक्ति मोर्चा के लिए केवल राजनीतिक विस्तार नहीं था, बल्कि यह वहां के आदिवासी-दलित-अल्पसंख्यक समाज के हक, सम्मान और पहचान की लड़ाई को मजबूत आवाज देने का एक ठोस कदम भी था। राज्य में आदिवासियों की दयनीय स्थिति – ST का दर्जा न मिलना, चाय बागान के मजदूरों को उचित मजदूरी का अभाव, और जमीन के अधिकार से वंचित रहना – इन गंभीर मुद्दों ने इस संघर्ष की नींव रखी। सीमित संसाधनों और बिना किसी बड़े गठबंधन के JMM ने 16 सीटों पर चुनाव लड़कर अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज कराई। पहली ही कोशिश में 2 सीटों पर दूसरे स्थान पर रहना, 7 सीटों पर 15 हजार से अधिक मत प्राप्त करना इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पार्टी ने जनता के बीच अपनी पकड़ बनानी शुरू कर दी है। यह प्रदर्शन दर्शाता है कि यह केवल शुरुआत है और आने वाले समय में संगठन और भी मजबूत होकर उभरेगा। यह परिणाम एवं लोगों का भरोसा इस बात को और स्पष्ट करती है कि आदिवासी समाज के मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती से उठाने की आवश्यकता है।

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि यह केवल एक चुनावी प्रयास नहीं, बल्कि अस्तित्व, पहचान और अधिकारों की लड़ाई है, और आपके साथ, आपके विश्वास के साथ, यह संघर्ष निरंतर जारी रहेगा।

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